क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल: भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर मंडराया संकट

Global Energy News: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। 11 मई को ब्रेंट क्रूड वायदा 3.14% की बढ़त के साथ 104.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 4.11% उछलकर 99.34 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की चिंताओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है।

भू-राजनीतिक तनाव और बाजार का रुख

अमेरिका और ईरान के बीच किसी ठोस समझौते पर सहमति न बन पाने के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्तमान शांति प्रस्तावों पर असंतोष जताया है, जिससे मध्य-पूर्व में तनाव और गहराने की आशंका है। इसके अलावा, ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आगामी मुलाकात में ईरान को मिलने वाली वित्तीय मदद और हथियारों के निर्यात पर चर्चा होने की उम्मीद है। इन अंतरराष्ट्रीय घटनाओं ने तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है।

भारत में ईंधन की कीमतों में वृद्धि के संकेत

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में 15 मई से पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है। तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को कच्चे तेल की ऊंची लागत और स्थिर खुदरा कीमतों के कारण भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ रहा है। कंपनियों के मुनाफे पर बढ़ते दबाव को देखते हुए ईंधन की कीमतों में संशोधन अब अनिवार्य माना जा रहा है।

OMCs को हर महीने 30,000 करोड़ का नुकसान

भारतीय तेल कंपनियां वर्तमान में लगभग 30,000 करोड़ रुपये प्रति माह की ‘अंडर-रिकवरी’ या वित्तीय घाटे का सामना कर रही हैं। मध्य-पूर्व में जारी युद्ध की स्थिति ने कच्चे तेल की कीमतों को 70 डॉलर से बढ़ाकर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचा दिया था, जिससे लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर काफी बढ़ गया है। इसी इनपुट कॉस्ट की भरपाई के लिए अब आम जनता पर पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों का बोझ पड़ना लगभग तय नजर आ रहा है।

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