बंगाल के एग्जिट पोल पर सबसे बड़ा सस्पेंस! Axis My India ने क्यों रोके आंकड़े, क्या है मतदाताओं की चुप्पी का राज?

New Delhi News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल को लेकर एक बहुत बड़ा ट्विस्ट सामने आया है। मशहूर सर्वे एजेंसी एक्सिस माय इंडिया (Axis My India) ने बंगाल के एग्जिट पोल आंकड़े जारी करने से साफ इनकार कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि उसे बंगाल से पर्याप्त सैंपल नहीं मिल पाए हैं। मतदाताओं की चुप्पी ने इस बार सर्वे एजेंसियों का पूरा गणित बिगाड़ कर रख दिया है। अब तक कई अन्य एजेंसियां अपने आंकड़े जारी कर चुकी हैं।

मतदाताओं ने क्यों साधी पूरी तरह चुप्पी?

एक्सिस माय इंडिया के प्रबंध निदेशक प्रदीप गुप्ता ने इसके पीछे की असली वजह बताई है। उन्होंने कहा कि उनका सर्वे लोगों से आमने-सामने बात करने पर आधारित होता है। पहले चरण के मतदान के बाद जब टीम ने लोगों से बात की, तो 60 से 70 फीसदी मतदाताओं ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। लोग इस बात पर हामी भरने या ना कहने को भी तैयार नहीं थे कि उन्होंने किसे वोट दिया है। गुप्ता ने इसके पीछे भय के माहौल को एक बड़ा कारण माना है।

छोटे सैंपल के आधार पर अनुमान लगाना गलत

प्रदीप गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इतने छोटे सैंपल साइज के आधार पर किसी भी तरह का अनुमान लगाना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि केवल 20 से 30 प्रतिशत लोगों के जवाब पर चुनाव के सटीक नतीजे नहीं बताए जा सकते। एजेंसी ने मतदान खत्म होने के बाद गुरुवार को एक बार फिर लोगों से बात करने की कोशिश की थी। उन्हें उम्मीद थी कि चुनाव खत्म होने के बाद लोग ज्यादा खुलकर बोलेंगे, लेकिन स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया।

बंगाल में टूटा स्वतंत्रता के बाद का सारा रिकॉर्ड

इस बार पश्चिम बंगाल में हुए दो चरणों के चुनाव में 92.47 प्रतिशत भारी मतदान दर्ज किया गया है। पहले चरण में 93.13 प्रतिशत और दूसरे चरण में 91.66 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले। यह आजादी के बाद से बंगाल में हुआ अब तक का सबसे अधिक मतदान है। इस बार के मतदान ने साल 2011 के 84 प्रतिशत वोटिंग के पुराने रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है। 2011 में ही ममता बनर्जी ने 34 साल के वामपंथी शासन को खत्म किया था।

ममता बनर्जी के लिए जीवन की सबसे निर्णायक लड़ाई

ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव उनके पूरे राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी और निर्णायक लड़ाई माना जा रहा है। पिछले 15 सालों से सत्ता पर काबिज ममता न केवल मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने बल्कि अपने स्थापित राजनीतिक ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए भी संघर्ष कर रही हैं। कुछ एग्जिट पोल इस बार भाजपा की जीत का दावा कर रहे हैं। वहीं कुछ अन्य सर्वे तृणमूल कांग्रेस (TMC) को फिर से भारी बहुमत मिलने का अनुमान लगा रहे हैं।

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