राम मंदिर दान विवाद के बाद ट्रस्ट को पहले सीईओ की तलाश, योग्यता के लिए कॉर्पोरेट डिग्री से बड़ी शर्त ‘राम भक्ति’

Ayodhya News: श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि की हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट अपने प्रबंधन को पूरी तरह से चुस्त-दुरुस्त करने में जुट गया है। श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखने के लिए अब पहली बार एक समर्पित चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) की नियुक्ति की जाएगी। हालांकि, इस अहम पद के लिए सिर्फ बड़ी डिग्रियां या कॉर्पोरेट अनुभव ही काफी नहीं होगा।

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कॉर्पोरेट दिमाग से ज्यादा जरूरी भगवान राम के प्रति सच्ची श्रद्धा

सीईओ की खोज के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी के सदस्य सुरेश हावरे ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार में सबसे पहली खूबी “भगवान राम के प्रति गहरी श्रद्धा का भाव” होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी सूखा प्रोफेशनल (केवल पेशेवर सोच वाला व्यक्ति) इतने बड़े और पवित्र मंदिर की व्यवस्था को नहीं चला सकता है।

सुरेश हावरे के अनुसार, नए सीईओ के कंधों पर मंदिर प्रबंधन की ‘रीढ़’ बनने की जिम्मेदारी होगी। उन्हें रोजाना आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को सुचारू रूप से संभालने, आपातकालीन स्थिति से निपटने, मानव संसाधन की देखरेख करने और सबसे महत्वपूर्ण रूप से मंदिर के वित्तीय प्रबंधन तथा खरीद-फरोख्त की व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी।

परमाणु वैज्ञानिक और पूर्व शिर्डी ट्रस्ट प्रमुख संभाल रहे जिम्मेदारी

ट्रस्ट ने इस योग्य अधिकारी को खोजने के लिए बीते 6 जुलाई को एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया था। इस विशेष समिति में शामिल सुरेश हावरे खुद एक रिटायर्ड परमाणु वैज्ञानिक हैं और शिर्डी के मशहूर श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट के प्रमुख भी रह चुके हैं। उन्होंने मंदिर प्रबंधन के विषय पर एक विस्तृत किताब भी लिखी है।

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इस प्रतिष्ठित कमेटी में हावरे के साथ सेवानिवृत्त जस्टिस प्रदीप कोहली और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी जैसे अनुभवी लोग शामिल हैं। करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े होने के कारण इस चयन प्रक्रिया को शीर्ष प्राथमिकता दी जा रही है। कमेटी के सदस्य जल्द ही दिल्ली में आमने-सामने बैठकर उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम चर्चा करेंगे।

500 वर्षों का लंबा संघर्ष और आधुनिक तकनीक का होगा संगम

हावरे ने बताया कि अयोध्या के लिए एक बिल्कुल अनूठे और मजबूत एडमिनिस्ट्रेशन मॉडल की जरूरत है। यह सिर्फ एक नवनिर्मित मंदिर नहीं है, बल्कि इसके साथ 500 से अधिक वर्षों का लंबा ऐतिहासिक संघर्ष और करोड़ों हिंदुओं की गहरी भावनाएं जुड़ी हैं। वर्तमान में यहां हर रोज दो लाख से भी ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

इतनी बड़ी संख्या को नियंत्रित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीक के साथ-साथ एक बेहतरीन मैनेजमेंट सिस्टम खड़ा किया जाएगा। हालिया दान विवादों को देखते हुए ट्रस्ट का पूरा ध्यान अब पाई-पाई के सही हिसाब, सुरक्षित वित्तीय निवेश, पारदर्शिता और मंदिर के धन से अस्पताल, स्कूल तथा वृद्धाश्रम जैसी समाज सेवा योजनाओं को चलाने पर है।

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