राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा एक्शन; चंपत राय समेत तीन पूर्व पदाधिकारियों की डिजिटल आईडी ब्लॉक

Ayodhya News: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बेहद बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मंदिर प्रशासन से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट ने पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव की डिजिटल आईडी को तत्काल प्रभाव से निष्क्रिय (डीएक्टिवेट) कर दिया है।

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यह कड़ा कदम मंदिर में आने वाले वीआईपी श्रद्धालुओं के लिए विशिष्ट दर्शन पास जारी करने की प्रक्रिया में सामने आईं कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों को रोकने के लिए उठाया गया है। नए प्रशासन के इस फैसले के बाद अब इन तीनों पूर्व पदाधिकारियों की सिफारिशों से कोई पास जारी नहीं हो सकेगा।

डिजिटल आईडी के गलत इस्तेमाल से बने सैकड़ों वीआईपी पास

मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन की अध्यक्षता वाले नए प्रशासन ने यह कड़ा निर्णय लिया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की शुरुआती जांच में यह पाया गया कि इन वरिष्ठ पदाधिकारियों की डिजिटल आईडी का बड़ी संख्या में फर्जी वीआईपी पास बनाने के लिए गलत इस्तेमाल किया गया था।

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों में से एक टिन्नू यादव ने सिस्टम की इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाया। उसने इन आईडी के जरिए अवैध रूप से सैकड़ों अनधिकृत सुगम और विशिष्ट दर्शन पास बनाकर बाजार में धड़ल्ले से बांटे थे।

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लाखों रुपये के घोटाले में एसआईटी ने 8 लोगों को किया गिरफ्तार

अधिकारियों के मुताबिक, चंपत राय और अनिल मिश्रा के कुछ बेहद करीबी सहयोगी भी वीआईपी पास जारी करने के नाम पर एक बड़ा रैकेट चलाने के संदेह में हैं। इस अवैध धंधे के जरिए लाखों रुपये कमाने के मामले में वे अभी पुलिस और जांच एजेंसी के रडार पर चल रहे हैं।

जून के पहले सप्ताह में राम मंदिर के बैंक खातों और दान राशि की गिनती में बड़ी वित्तीय गड़बड़ी सामने आई थी। विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। प्राथमिक जांच में गबन के पुख्ता सबूत मिलने के बाद पुलिस ने दान-गणना प्रक्रिया से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया है।

आईएफएस अधिकारी कृष्ण मोहन ने संभाली ट्रस्ट की कमान

इस पूरे विवाद के बीच चंपत राय ने ट्रस्ट के महासचिव पद से अपना इस्तीफा दे दिया था, जिसे 6 जुलाई को स्वीकार कर लिया गया। उनकी जगह भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी कृष्ण मोहन को नया कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किया गया है, जिन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी।

इसके साथ ही अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया है, जबकि गोपाल राव को उनकी जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। हालांकि, दर्ज हुई एफआईआर में इन तीनों के नाम आरोपी के रूप में शामिल नहीं हैं, लेकिन विपक्ष लगातार वरिष्ठ पदों पर होने के नाते इनसे नैतिक जवाबदेही की मांग कर रहा है।

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