प्रयागराज में सोलर पैनल लगवाने के बाद भी क्यों आ रहा हजारों का बिजली बिल, जानिए इसके पीछे की मुख्य वजहें

Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बिजली बिल कम करने के लिए हजारों लोगों ने अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाए हैं। लेकिन जून का भारी बिल आने के बाद कई उपभोक्ताओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया। सोलर सिस्टम होने के बावजूद हजारों रुपये का बिल मिलने से लोग असमंजस में हैं।

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ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि हर सोलर उपभोक्ता का मासिक बिल शून्य होना बिल्कुल जरूरी नहीं है। कई तकनीकी कारणों और बिलिंग गड़बड़ियों की वजह से उपभोक्ताओं को भुगतान करना पड़ सकता है। बिजली विभाग के अनुसार जून में कुछ बिलिंग समायोजन प्रभावित हुए, जिससे बिल अधिक दिखाई दे रहे हैं।

पीएम सूर्य घर योजना के तहत तेजी से बढ़ा सोलर रूफटॉप का दायरा

प्रयागराज में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलर रूफटॉप का दायरा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। जिले में अब तक 36,755 लोगों ने इसके लिए आवेदन किया है। इनमें से 22,101 घरों में सोलर पैनल स्थापित हो चुके हैं, जबकि 19,760 उपभोक्ताओं को सरकारी सब्सिडी भी मिल चुकी है।

घरेलू उपभोक्ताओं के बीच इन दिनों सबसे अधिक मांग 3 किलोवाट क्षमता वाले सोलर सिस्टम की देखी जा रही है। वेंडर्स के अनुसार इसे लगाने में औसतन 1.80 लाख से 1.84 लाख रुपये तक का खर्च आता है। सरकारी योजना के तहत पात्र परिवारों को 1.08 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलती है।

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जानिए सोलर पैनल लगने के बाद भी क्यों आता है भारी बिल

सोलर वेंडर्स बताते हैं कि पैनल जितनी बिजली बनाते हैं, सबसे पहले सरकारी नेट मीटरिंग प्रणाली द्वारा उसका समायोजन होता है। इसके बाद यदि घर की कुल बिजली खपत उत्पादन से अधिक रहती है, तो केवल अतिरिक्त यूनिट का ही बिल बनता है। एयर कंडीशनर और भारी मोटर चलाने से अंतर बढ़ता है।

जून माह में कई उपभोक्ताओं ने सामान्य से अधिक बिजली बिल आने की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ मामलों में सोलर से उत्पादित यूनिट का समायोजन समय पर सॉफ्टवेयर में अपडेट नहीं हो पाया। नेट मीटर रीडिंग और डेटा अपडेट में देरी से भी ऐसी तकनीकी दिक्कतें आती हैं।

स्मार्ट उपयोग और बिजली उपकरणों की मॉनिटरिंग से होगी पूरी बचत

तकनीकी जानकारों का कहना है कि केवल सोलर पैनल लगवा लेने से ही पूरी आर्थिक बचत नहीं होती है। इसके लिए भारी बिजली उपकरणों का संतुलित उपयोग करना बेहद जरूरी है। उपभोक्ताओं को दिन में सोलर उत्पादन के समय ही पानी की मोटर और वाशिंग मशीन जैसे उपकरण चलाने चाहिए।

स्थानीय उपभोक्ता राम बाबू और कमल ने बताया कि सोलर से काफी राहत मिलती है, लेकिन बिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। ऊर्जा विशेषज्ञ टिपुरेंद्र त्रिपाठी के अनुसार नेट मीटरिंग की तकनीकी दिक्कतों का समय पर समाधान और नियमित मॉनिटरिंग करने से उपभोक्ताओं को इस योजना का पूरा लाभ मिलेगा।

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