महाराष्ट्र में आसमानी आफत: मुंबई-पुणे में मूसलाधार बारिश से भारी तबाही, भूस्खलन और हादसों में कई लोगों की मौत

Mumbai News: महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे सहित कई हिस्सों में हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते जनजीवन और यातायात व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है। पुणे जिले में भूस्खलन और दीवार गिरने से चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।

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बारिश के कारण दो अन्य लोग अलग-अलग हादसों में बह गए हैं। प्रशासन ने त्वरित एक्शन लेते हुए जलभराव वाले इलाकों से 500 से अधिक लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण दोनों बड़े शहरों के बीच सड़क कनेक्टिविटी टूट गई है।

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और रेलवे ट्रैक पर भूस्खलन से थमी रफ्तार

इस भीषण बारिश के कारण 94 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे और रेल यातायात पूरी तरह ठप हो गया। महानगर की सड़कें जलमग्न हो गईं और सैकड़ों पेड़ उखड़ गए। इसके चलते एक्सप्रेसवे के नए ‘मिसिंग लिंक’ खंड पर करीब 100 टन पहाड़ी मलबा गिरने से वाहनों की रफ्तार थम गई।

अधिकारियों के मुताबिक करीब 18 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मलबे को साफ किया गया। सुरक्षा निरीक्षण पूरा होने के बाद सोमवार रात को इस रूट पर यातायात दोबारा बहाल हो सका। वहीं कर्जत-लोनावला भोर घाट खंड में पटरियों के नीचे की गिट्टी बहने से लोकल और एक्सप्रेस ट्रेन सेवाएं रोकनी पड़ीं।

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मौसम विभाग का रेड अलर्ट और स्कूलों में छुट्टी की घोषणा

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मुंबई, ठाणे और रायगढ़ जिलों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। इसके बाद एहतियात के तौर पर प्रशासन ने सभी स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए हैं। सरकार ने निजी कंपनियों को भी अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने की सख्त सलाह दी है।

बीएमसी की रिपोर्ट के अनुसार उपनगरों में 65 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज हुई है। वहीं पालघर में महज दो घंटे के भीतर 300 मिलीमीटर पानी बरसने से हालात बेकाबू हो गए। इसके कारण मुंबई हवाई अड्डे पर आने वाली पांच इंटरनेशनल फ्लाइट्स का रूट डायवर्ट करना पड़ा।

सरकार का पूरा आपदा प्रबंधन तंत्र हाई अलर्ट पर तैनात

आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में हादसों के कारण 13 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष में हालात की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पूरी तरह मुस्तैद हैं।

दूसरी ओर विपक्ष ने इस मानसून संकट को लेकर विधान भवन की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार पर बुनियादी ढांचे की नाकामी के गंभीर आरोप लगाए। हालांकि मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पहाड़ियों के खिसकने से यह प्राकृतिक हादसा हुआ है।

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