Patna Cyber Fraud: पटना में किराये पर फ्लैट और पीजी तलाश रहे युवा सावधान, आर्मी अफसर बनकर ठगों ने ऐंठे करोड़ों रुपये

Patna News: बिहार की राजधानी पटना में पढ़ाई और नौकरी के लिए आने वाले युवाओं के लिए किराये पर कमरा तलाशना अब एक बड़ा साइबर ट्रैप बन चुका है। जालसाज सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सस्ते फ्लैट या पीजी के झूठे विज्ञापन डालकर छात्रों को निशाना बना रहे हैं।

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साइबर ठग एडवांस बुकिंग और सिक्योरिटी मनी के नाम पर युवाओं से हजारों रुपये ऐंठ रहे हैं। ऑनलाइन भुगतान प्राप्त होते ही ठग अपना मोबाइल नंबर बंद कर देते हैं। इसके साथ ही वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से अपनी फर्जी प्रोफाइल भी पूरी तरह हटा लेते हैं।

आर्मी अफसर बनकर फर्जी पहचान पत्र से जीतते हैं भरोसा

साइबर अपराधी खुद को सेना का बड़ा अधिकारी या रसूखदार सरकारी कर्मचारी बताकर लोगों का भरोसा जीतते हैं। वे इंटरनेट पर आलीशान कमरों की आकर्षक तस्वीरें डालकर बहुत कम किराये का लालच देते हैं। इसके बाद वे वाट्सएप पर फर्जी पहचान पत्र भेजकर एडवांस रकम मांगते हैं।

पटना में हर साल हजारों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और कॉलेजों में दाखिले के लिए आते हैं। स्थानीय रास्तों की सही जानकारी न होने के कारण ये बाहरी छात्र ठगों का आसान शिकार बन रहे हैं। गिरोह के सदस्य सीमित सीट का दबाव बनाकर तुरंत ऑनलाइन ट्रांसफर करवाते हैं।

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एक साल में सामने आईं 200 से अधिक शिकायतें

साइबर थाना के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले एक साल में कमरा दिलाने के नाम पर 200 से अधिक लिखित शिकायतें दर्ज हुई हैं। इन मामलों में ठगों ने करीब 1.2 करोड़ रुपये की बड़ी चपत लगाई है। पुलिस ने इस कार्रवाई में 8 सक्रिय गिरोहों के 22 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि कई अंतरराज्यीय गिरोह दूसरे राज्यों से बैठकर यह पूरा नेटवर्क ऑपरेट कर रहे हैं। ठगी की रकम बैंक खातों में आने के महज 10 मिनट के भीतर कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है। इस वजह से पैसे रिकवर करना काफी मुश्किल हो जाता है।

बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किरायेदार रखने से बढ़ा सुरक्षा खतरा

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक साइबर पुलिस ने अब तक 200 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया पेज और 50 से ज्यादा बैंक अकाउंट पूरी तरह बंद कराए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पटना के अधिकांश पीजी और मकानों में किरायेदारों का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया जाता है।

बिना सत्यापन के मकान देने से अपराधियों के लिए अपनी असली पहचान छिपाकर रहना बेहद आसान हो जाता है। पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे बिना खुद जाकर देखे कभी भी एडवांस पेमेंट न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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