Sriharikota News: अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने 18 जुलाई को नया इतिहास रच दिया है। देश की पहली निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा तैयार किए गए रॉकेट विक्रम-1 ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी। इस लॉन्चिंग को भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
इस बहु-चरण रॉकेट को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रवाना किया गया। यह रॉकेट तीन ठोस ईंधन चरणों और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल की तकनीक से चलता है। यह पृथ्वी की निचली कक्षा में 350 किलोग्राम तक के पेलोड को स्थापित करने की क्षमता रखता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी स्काईरूट टीम को बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर देश के युवाओं की प्रतिभा और संकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकारी सुधारों के कारण निजी स्पेस सेक्टर में नवाचार के नए अवसर पैदा हुए हैं। पीएम मोदी ने टीम को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि यह मिशन आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करेगा।
3D-प्रिंटेड इंजन तकनीक से लैस है नया विक्रम-1 रॉकेट
यह रॉकेट सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा है और इसे पूरी तरह कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर से तैयार किया गया है। इसमें आधुनिक 3D-प्रिंटेड इंजन और हाई-थ्रस्ट सॉलिड-फ्यूल बूस्टर का इस्तेमाल हुआ है। यह छोटे सैटेलाइट्स को आसानी से 450 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में पहुंचा सकता है।
इस ऐतिहासिक उड़ान में कई तकनीक-प्रदर्शन पेलोड्स भी अंतरिक्ष में भेजे गए हैं। इनमें ग्रह स्पेस का अर्थ-ऑब्जर्वेशन नैनोसैटेलाइट, कॉस्मोसर्व का डेब्रिस हटाने वाला पेलोड और स्काईरूट का अपना स्कोप पेलोड शामिल है। स्काईरूट ने साल 2022 में भी अपने सबऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-एस से पहली निजी उड़ान का रिकॉर्ड बनाया था।

