कंफर्म टिकट होने के बाद भी ट्रेन में सीट न मिलने पर रेलवे देगा 50 हजार का हर्जाना, जानें अपने अधिकार

Thiruvananthapuram News: भारतीय रेलवे में कंफर्म टिकट होने के बाद भी सीट न मिलना अब सेवा में कमी माना जाएगा। उपभोक्ता अदालत के एक बड़े फैसले के बाद यात्रियों को मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। अगर आपको रिजर्व कोच में परेशानी होती है, तो आप कानूनी कदम उठाकर अपने हक के लिए लड़ सकते हैं।

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कंफर्म टिकट पर सीट न मिलने पर उपभोक्ता अदालत सख्त

केरल के तिरुवनंतपुरम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक यात्री की शिकायत पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने रेलवे की लापरवाही को सेवा में बड़ी कमी माना है। आयोग ने पीड़ित यात्री को मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 50 हजार रुपये का हर्जाना देने का आदेश जारी किया है।

अक्सर यात्री महीनों पहले टिकट बुक करते हैं ताकि सफर आरामदायक हो सके। इसके बावजूद रिजर्व कोच में बिना टिकट यात्रियों या अनधिकृत कब्जे के कारण पैर रखने की जगह नहीं मिलती। इस फैसले ने साफ कर दिया है कि कंफर्म टिकट का मतलब सिर्फ सीट नंबर मिलना नहीं बल्कि पूरी सुविधा पाना है।

ट्रेन में सफर के दौरान परेशानी होने पर तुरंत करें शिकायत

अगर आपकी आरक्षित सीट पर किसी ने जबरन कब्जा कर लिया है, तो चुप बैठने के बजाय तुरंत एक्शन लें। आप रेल मदद ऐप या हेल्पलाइन नंबर 139 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत करने के बाद आपको एक यूनिक नंबर मिलेगा, जिसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

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इसके अलावा ट्रेन में मौजूद टीटीई को समस्या बताएं और अनधिकृत यात्रियों को हटाने की मांग करें। यदि टीटीई बात नहीं सुनता है, तो अगले स्टेशन पर आरपीएफ से सीधे मदद मांग सकते हैं। रेलवे प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से उत्तरदायी होता है।

उपभोक्ता फोरम में मामला साबित करने के लिए जरूरी सबूत

केवल मौखिक शिकायत के आधार पर उपभोक्ता अदालत में मुआवजा पाना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए सफर के दौरान कोच में अत्यधिक भीड़ और अपनी सीट पर हुए कब्जे के फोटो या वीडियो जरूर बना लें। यह डिजिटल सबूत कानूनी लड़ाई में आपकी स्थिति को बहुत मजबूत बनाते हैं।

इसके साथ ही अपना ट्रेन नंबर, कोच नंबर, पीएनआर की जानकारी और रेल मदद पर की गई शिकायत का स्क्रीनशॉट संभालकर रखें। यदि रेलवे कर्मचारी समस्या सुलझाने में नाकाम रहते हैं, तो आप इन सभी दस्तावेजों के साथ जिला उपभोक्ता फोरम में मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च के मुआवजे का दावा कर सकते हैं।

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