पुणे में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में मेरठ के डॉक्टर ने फेफड़ों के इलाज की आधुनिक तकनीक साझा की

- Advertisement -

Pune News: महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित तीन दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस ब्रांकोकॉन-2026 में मेरठ के वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन डॉक्टर वीरोत्तम तोमर को विशेष एक्सपर्ट फैकल्टी के रूप में आमंत्रित किया गया। उन्होंने वहां देशभर से आए विशेषज्ञों के सामने एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड तकनीक पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने फेफड़ों के इलाज में आ रहे नए बदलावों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।

डॉक्टर वीरोत्तम ने लाइव वर्कशॉप के जरिए बताया कि ईबस यानी एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड फेफड़ों की गंभीर बीमारियों के सटीक निदान में बेहद कारगर है। यह एक ऐसी उन्नत तकनीक है जिससे बिना किसी बड़ी सर्जरी के फेफड़ों के अंदर की गांठों और लिम्फ नोड्स की जांच आसानी से हो जाती है। मरीज को इससे काफी राहत मिलती है।

- Advertisement -

बीमारियों की जांच में नई तकनीक का महत्व

विशेषज्ञ ने स्पष्ट किया कि फेफड़ों में गांठ दिखते ही सीधा तपेदिक यानी टीबी का उपचार शुरू करना ठीक नहीं है। कई बार ये गांठें लंग कैंसर या सारकॉइडोसिस जैसी बीमारियों की भी हो सकती हैं। ऐसे में सही बायोप्सी रिपोर्ट मरीज को गलत इलाज से बचाती है। डॉक्टर ने कहा कि डायग्नोसिस ही सही उपचार की पहली सीढ़ी है।

मेरठ में ईबस तकनीक लंबे समय से उपलब्ध है। डॉक्टर वीरोत्तम के अनुसार, इस तकनीक से जांच कराने पर मरीज को दर्द कम होता है और रिकवरी भी तेजी से होती है। तीन दिवसीय इस बड़े आयोजन में देश-विदेश के दो हजार से अधिक पल्मोनोलॉजिस्ट शामिल हो रहे हैं। यहां ब्रोंकोस्कोपी और फेफड़ों के इलाज की नई तकनीकों पर व्यापक चर्चा हो रही है।

- Advertisement -

बड़ी खबरें

Topics

Related Articles