मुजफ्फरपुर के SKMCH में पुलिस की लापरवाही से बह रहा लाखों का केमिकल, अज्ञात शवों को लेकर बड़ा खुलासा

Muzaffarpur News: बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज (एसकेएमसीएच) में पुलिस की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए लाए जा रहे अज्ञात शवों के कारण कॉलेज में हर महीने लाखों रुपये का कीमती फॉर्मेलिन केमिकल बर्बाद हो रहा है।

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मामला यह है कि पुलिस बिना पहचान सुनिश्चित किए आनन-फानन में शवों को मेडिकल कॉलेज भेज रही है। एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. शोभा कुमारी ने बताया कि जब शवों को सुरक्षित रखने के लिए उसमें फॉर्मेलिन केमिकल डाल दिया जाता है, तो उसके तुरंत बाद परिजन आकर शव ले जाते हैं, जिससे पूरा केमिकल बर्बाद हो जाता है।

एक शव को सुरक्षित रखने में आता है 5 हजार का खर्च

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, एक शव को सड़ने से बचाने के लिए करीब 20 से 25 लीटर फॉर्मेलिन केमिकल की आवश्यकता होती है। बाजार में पांच लीटर फॉर्मेलिन की कीमत लगभग एक हजार रुपये है। इस प्रकार, एक ही शव पर चार से पांच हजार रुपये का केमिकल खर्च हो जाता है।

विभागाध्यक्ष ने बताया कि पुलिस की इस कार्यप्रणाली के कारण पिछले दिनों कॉलेज में फॉर्मेलिन की भारी किल्लत हो गई थी। हालांकि, वर्तमान में बीएमएसआईसीएल से आपूर्ति बहाल होने के बाद स्थिति नियंत्रण में है। सरकार ने दो साल पहले अज्ञात शवों को मेडिकल कॉलेज भेजने के निर्देश दिए थे।

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मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए शवों की भारी कमी

कॉलेज सूत्रों का कहना है कि पुलिस द्वारा भेजे जाने वाले अधिकांश शव या तो बहुत पुरानी स्थिति में होते हैं या क्षत-विक्षत होते हैं, जो छात्रों के डिसेक्शन (चीरफाड़) सीखने के योग्य नहीं होते। नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों के तहत हर 25 मेडिकल छात्रों पर एक शव होना अनिवार्य है।

इस बीच, बिहार के नीट यूजी छात्रों के लिए एक और बड़ी खुशखबरी है। नेशनल मेडिकल कमीशन ने नालंदा मेडिकल कॉलेज (एनएमसीएच) में एमबीबीएस की सीटें 150 से बढ़ाकर 200 कर दी हैं। कॉलेज की प्राचार्या डॉ. प्रो. उषा कुमारी ने पुष्टि की है कि सत्र 2026-27 से बढ़ी हुई सीटों पर दाखिले शुरू होंगे।

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