Mandsaur News: हिंदू धर्म में मंदिर की घंटियों की ध्वनि को बहुत शुभ माना जाता है। मध्य प्रदेश के मंदसौर में भगवान पशुपतिनाथ मंदिर परिसर के पास सहस्त्र शिवलिंग मंदिर में देश का सबसे बड़ा महा घंटा स्थापित किया गया है। इस अनोखे और विशालकाय घंटे का वजन करीब 3700 किलोग्राम है।
विशाल आकार के कारण यह महा घंटा मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस घंटे की कुल लंबाई लगभग 7.5 फीट और इसका व्यास करीब 6.5 फीट है। जब इसे बजाया जाता है, तो इसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है।
घर-घर से तांबा और पीतल जुटाकर तीन साल में हुआ निर्माण
इस अद्भुत महा घंटे के निर्माण के पीछे स्थानीय लोगों की वर्षों की कड़ी मेहनत जुड़ी है। श्री कृष्ण कामधेनु सामाजिक एवं धार्मिक संस्था ने मंदिर में विशाल घंटा लगाने का संकल्प लिया था। इसके बाद संस्था के सदस्यों ने धातु इकट्ठा करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया।
संस्था के सदस्यों ने कई सालों तक जिले के गांवों और शहरों में यात्राएं निकालीं। उन्होंने आम लोगों से पुराने पीतल और तांबे के बर्तन दान में मांगे। श्रद्धालुओं ने इस पावन कार्य के लिए भारी मात्रा में धातुओं के साथ अपना आर्थिक सहयोग भी खुले दिल से दिया था।
गुजरात के विशेष कारीगरों ने छह महीने में तैयार किया घंटा
करीब 3 साल तक चले इस लंबे अभियान के बाद भारी मात्रा में धातुएं इकट्ठी हुईं। इन सभी धातुओं को निर्माण के लिए गुजरात के अहमदाबाद भेजा गया था। वहां विशेष कारीगरों की टीम ने करीब 6 महीने तक लगातार काम करके इस विशाल घंटे को अंतिम रूप दिया।
निर्माण पूरा होने के बाद घंटे को प्राकृतिक तरीके से ठंडा करने की प्रक्रिया अपनाई गई। इसके लिए इसे कुछ समय तक जमीन के अंदर दबाकर रखा गया था। करीब 36 लाख रुपये की कुल लागत से तैयार होने के बाद इसे विशेष ट्रॉली से मंदसौर लाया गया।
क्रेन की मदद से मजबूत लोहे के स्ट्रक्चर पर किया स्थापित
इस 37 क्विंटल वजनी भारी-भरकम घंटे को मंदिर परिसर में स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके लिए इंजीनियर्स ने मजबूत लोहे का एक विशेष स्ट्रक्चर तैयार किया। घंटा लटकाने से पहले जमीन में करीब 3 मीटर गहरी और मजबूत नींव तैयार की गई थी।
इसके बाद भारी क्रेन मशीनों की मदद से इस महा घंटे को स्टैंड पर सुरक्षित रूप से स्थापित किया गया। श्रद्धालुओं के लिए एक मजबूत रस्सी की व्यवस्था की गई है, जिससे वे इसे आसानी से बजा सकते हैं। हालांकि सुरक्षा कारणों से घंटे के ठीक नीचे जाने पर रोक है।

