अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना की घुसपैठ के दावों को भारतीय सेना ने किया खारिज, बताया पूरी तरह बेबुनियाद

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Itanagar News: क्या चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अरुणाचल प्रदेश के पांच अलग-अलग स्थानों में घुसपैठ करके अपने सैन्य शिविर स्थापित कर लिए हैं? राज्य के एक स्थानीय संगठन द्वारा किए गए इस चौंकाने वाले दावे के बाद देश के रणनीतिक हलकों में सनसनी फैल गई है।

इस बड़े मामले पर भारतीय सेना ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सेना ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि इन मीडिया रिपोर्टों में कोई सच्चाई नहीं है। सेना ने सीमा पर घुसपैठ के इन आरोपों को बेबुनियाद और गलत बताया है।

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स्थानीय सामुदायिक संगठन के ज्ञापन के बाद शुरू हुआ विवाद

भारतीय सेना का यह बड़ा खंडन तब सामने आया है, जब देश की कई मुख्य मीडिया रिपोर्टों में अरुणाचल प्रदेश के एक सामुदायिक संगठन के ज्ञापन के हवाले से खबरें प्रकाशित की गईं। प्रशासन को सौंपे अपने विस्तृत ज्ञापन में इस समूह ने चीनी गतिविधियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।

संगठन ने आरोप लगाया था कि चीनी सेना पिछले कई वर्षों से राज्य के सुदूर सीमावर्ती इलाकों में अपनी मौजूदगी को धीरे-धीरे मजबूत कर रही है। समूह ने विशेष रूप से राज्य के तक्सिंग इलाके के पास 5 रणनीतिक स्थानों पर हाल ही में हुई नई चीनी घुसपैठ का दावा किया था।

नाह वेलफेयर सोसाइटी ने उपायुक्त को सौंपा था पत्र

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश के अपर सुभानसिरी जिले के तक्सिंग क्षेत्र में सक्रिय ‘नाह वेलफेयर सोसाइटी’ (NWS) नामक एक सामुदायिक संगठन ने वहां के उपायुक्त को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपा था। इस पत्र में दावा किया गया था कि चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है।

संगठन ने दावा किया कि चीनी सैनिकों ने पिछले 10 से 15 वर्षों में तक्सिंग सर्किल में सीमा के साथ लगे बड़े क्षेत्रों पर कब्जा जमाया है। चीनी सेना ने वहां पक्की सड़कें, पुल और आधुनिक सैन्य शिविर भी तैयार कर लिए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों का वहां जाना पूरी तरह बंद हो गया है।

वर्ष 2020 के बाद इन पांच जगहों पर कब्जे का आरोप

संगठन के अनुसार, ये वे पारंपरिक क्षेत्र हैं जिनका इस्तेमाल स्थानीय आदिवासी समुदाय शिकार करने, मवेशी चराने और जंगल से जड़ी-बूटियां इकट्ठा करने के लिए वर्षों से करते आ रहे थे। संगठन ने दावा किया कि ओयिंग, पानीयार, मारपान, पोतरांग झील और टिंडिंगटांग में चीनी सेना का 2020 के बाद से कब्जा हुआ है।

संगठन ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि इनमें से कुछ विवादित जगहें तो तक्सिंग मुख्यालय के बिल्कुल करीब हैं। ये क्षेत्र स्थानीय समुदायों के लिए बहुत बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखते हैं। संगठन ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह तुरंत हस्तक्षेप करके चीनी गतिविधियों को रोके।

भारतीय सेना ने दावों को बताया पूरी तरह गलत और निराधार

नाह वेलफेयर सोसाइटी ने अपने पत्र के साथ चीनी सेना की कथित गतिविधियों से जुड़े कई डिजिटल फोटो भी संलग्न किए थे। संगठन के इन तमाम दावों को भारतीय सेना ने पूरी तरह निराधार बताकर सोमवार को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया और देश को सुरक्षा का भरोसा दिया।

सेना ने कहा कि हमने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं जिनमें चीनी पीएलए की ओर से हालिया घुसपैठ और अरुणाचल प्रदेश में शिविर स्थापित करने का दावा किया गया है। ये सभी रिपोर्टें पूरी तरह गलत और बिना किसी ठोस आधार की हैं। भारतीय सेना सीमा की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

बीजिंग में भारत-चीन सीमा मामलों पर हुई थी 35वीं बैठक

चीनी सेना की ओर से अरुणाचल प्रदेश के नए इलाके कब्जाने के ये आरोप ऐसे संवेदनशील वक्त में सामने आए हैं, जब हाल ही में बीजिंग में भारत-चीन सीमा मामलों पर ‘वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन’ (WMCC) की 35वीं बैठक संपन्न हुई है।

इस द्विपक्षीय बैठक के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि सीमा पर शांति बनाए रखने को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चाएं रचनात्मक रहीं। दोनों पक्षों ने सीमा पर स्थिति की समीक्षा की और शांति बनाए रखने में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया था, जिससे संबंधों को सामान्य करने में मदद मिलेगी।

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