सफाई कर्मी से राजनीति की ओर: आलोक मौर्या अब लड़ेंगे चुनाव, ‘पुरुष आयोग’ के गठन की उठाएंगे मांग

Prayagraj News: अपनी एसडीएम पत्नी ज्योति मौर्या के साथ विवाद के बाद चर्चा में आए सफाई कर्मी आलोक मौर्या अब राजनीति के मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। आलोक ने स्पष्ट किया है कि वे जनसेवा के लिए चुनाव लड़ने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उनका मुख्य एजेंडा ‘पत्नी पीड़ित’ पुरुषों के लिए ‘पुरुष आयोग’ का गठन करवाना है। वे इस मांग को लेकर अब और अधिक मुखर होने जा रहे हैं ताकि समाज में पुरुषों की समस्याओं को भी एक प्रभावी मंच मिल सके।

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राजनीतिक दल नहीं, सामाजिक संगठन से शुरुआत

आलोक मौर्या मूल रूप से प्रयागराज के झलवा के निवासी हैं और वर्तमान में प्रतापगढ़ के बिहार ब्लॉक में सफाई कर्मी के पद पर तैनात हैं। इंटरनेट मीडिया पर उनके द्वारा नया राजनीतिक दल बनाने की खबरें चल रही थीं, जिस पर उन्होंने रविवार को स्थिति स्पष्ट की। आलोक ने बताया कि उन्होंने कोई नया दल नहीं बनाया है, बल्कि उन्हें ‘युवा शक्ति फाउंडेशन’ नामक सामाजिक संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे इसी माध्यम से समाज सेवा करेंगे।

स्वच्छ भारत मिशन और पुरुष आयोग का एजेंडा

राजनीति में कदम रखने के पीछे आलोक का एक बड़ा उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ को और अधिक सशक्त बनाना है। इसके साथ ही, उन्होंने समाज में पुरुषों के प्रति बढ़ रहे उत्पीड़न पर चिंता जताई। आलोक ने कहा कि देश में कई पुरुष अपनी पत्नियों से प्रताड़ित हैं और कुछ तो आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे महिलाओं के विरोधी नहीं हैं, बल्कि केवल उनके द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न के खिलाफ हैं।

डिप्टी सीएम केशव मौर्या से की मुलाकात

चुनाव लड़ने की अपनी मंशा को लेकर आलोक मौर्या काफी गंभीर नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे पांच मई को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से भी मुलाकात कर चुके हैं। आलोक ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या कोई अन्य राजनीतिक दल उन्हें अवसर प्रदान करता है, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव में प्रयागराज, कौशांबी या प्रतापगढ़ में से किसी भी जिले की सीट से चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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विवादों से चर्चा में आए थे आलोक मौर्या

आलोक मौर्या और उनकी पत्नी ज्योति मौर्या के बीच का पारिवारिक विवाद सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक काफी सुर्खियों में रहा था। ज्योति मौर्या के एसडीएम पद पर होने और आलोक के सफाई कर्मी होने के कारण इस मामले ने ‘बेवफाई’ और ‘धोखाधड़ी’ जैसे गंभीर आरोपों के साथ सामाजिक बहस छेड़ दी थी। अब आलोक उसी चर्चा और अपनी पहचान को राजनीतिक आधार देकर एक नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं, जिसमें सामाजिक न्याय उनका मुख्य मुद्दा है।

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