Himachal News: हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल पर छह महीने की रोक लगाने और एस्मा कानून लागू करने पर सियासत गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा ने इसे सुक्खू सरकार की कर्मचारी विरोधी सोच बताया है।
पूर्व परिवहन मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बिक्रम ठाकुर ने मंगलवार को राज्य सरकार के इस फैसले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह तानाशाही भरा कदम है। सरकार बातचीत के जरिए कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय कानून के बल पर उनकी आवाज दबा रही है।
भाजपा नेता ने कहा कि एचआरटीसी कर्मी लंबे समय से सैलरी, भत्तों और विभिन्न फाइनेंशियल लाभों के लिए परेशान हैं। कर्मचारियों की इन जायज मांगों पर गंभीरता दिखाने के बजाय सीधे प्रतिबंध थोप दिए गए। लोकतंत्र में हर वर्ग को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने का पूरा अधिकार प्राप्त है।
प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए कानून का दुरुपयोग
बिक्रम ठाकुर के मुताबिक परिवहन निगम इस समय भारी आर्थिक संकट और विभिन्न चुनौतियों से जूझ रहा है। विभाग में नई बसों की भारी कमी है। इसके अलावा ड्राइवर और कंडक्टर सहित कई कैटेगरीज के पद खाली पड़े हैं। सरकार अपनी कमियां छिपाने के लिए कड़े नियम ला रही है।
उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी वादे भूलने का बड़ा आरोप लगाया। सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने कर्मचारियों के हितों की बड़ी-बड़ी बातें की थीं। आज वही स्टाफ अपने हक के पैसों के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहा है। सरकार को तुरंत कर्मचारी संगठनों के साथ टेबल टॉक करनी चाहिए।
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि एस्मा जैसे गंभीर कानून का इस्तेमाल बेहद असाधारण परिस्थितियों में किया जाता है। हिमाचल में प्रशासनिक फेल्योर को छिपाने के लिए इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करने की पुरजोर मांग उठाई है।
दूसरी तरफ भारतीय मजदूर संघ के पूर्व अध्यक्ष और एचआरटीसी बोर्ड के पूर्व डायरेक्टर अशोक पुरोहित ने भी इस फैसले को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के करोड़ों रुपये के एरियर को रोकने के लिए सरकार दमनकारी नीतियां अपना रही है जो कि पूरी तरह गलत है।
अशोक पुरोहित ने कहा कि एचआरटीसी मामलों में हाई कोर्ट के फैसलों को लागू न करने पर सरकार को सुप्रीम कोर्ट से भी फटकार लग चुकी है। अगर सरकारी बस सेवाएं अनिवार्य हैं, तो स्टाफ के अधिकार भी उतने ही जरूरी हैं। सरकार को तुरंत लंबित वित्तीय देनदारियों का भुगतान करना चाहिए।
