Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। एक उच्च स्तरीय बैठक में सीएम ने घोषणा की कि राज्य सरकार अब रसायनमुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रदान कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बागवानी को प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि किसानों को कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ देने के लिए बागवानी विभाग को हर संभव सहयोग मिलेगा। इस विभाग के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए खाली पड़े सभी पदों को जल्द से जल्द भरा जाएगा।
एचपी-शिवा प्रोजेक्ट की समीक्षा और अधिकारियों को निर्देश
बैठक में मुख्यमंत्री ने एचपी-शिवा प्रोजेक्ट की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य की अलग-अलग भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के हिसाब से फलों की नई किस्में उगाई जाएं। इसके साथ ही बागवानों को समय-समय पर जरूरी तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन देने के आदेश दिए।
सीएम सुक्खू ने जनजातीय विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की रफ्तार भी जांची। उन्होंने दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों में तेजी लाने को कहा। सरकार का लक्ष्य इन दूरदराज के इलाकों में रहने वाले आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ समय पर पहुंचाना है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में निचार, पांगी, भरमौर और लाहौल के एकलव्य आदर्श आवासीय स्कूलों के कामकाज की रिपोर्ट भी ली गई। इन स्कूलों में अभी 1013 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि भविष्य के इन होनहार बच्चों को शिक्षा के लिए बेहतरीन सुविधाएं मिलनी चाहिए।
इस प्रशासनिक बैठक में बागवानी और जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी मौजूद रहे। उनके साथ एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ओंकार शर्मा और सेक्रेटरी सी. पालरासू सहित कई अन्य सीनियर अधिकारी भी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर नीतियां लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

