Shimla News: भारत के कई पहाड़ी राज्यों में बाहर से आए लोगों के लिए जमीन खरीदना बेहद मुश्किल है। इन स्पेशल रूल्स को लागू करने का मुख्य मकसद स्थानीय निवासियों के अधिकारों की रक्षा करना है। इसके साथ ही पारंपरिक संस्कृति, सीमित खेती की जमीन और संवेदनशील पर्यावरण को बचाना है।
इस तरह का सबसे पहला और ऐतिहासिक कानून साल 1972 में बना था। हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट के तहत इसे लागू किया गया था। इस कानून को बनाने के पीछे एक बड़ी वजह पहाड़ी समुदायों की विशिष्ट डेमोग्राफिक और कल्चरल आइडेंटिटी को हमेशा सुरक्षित रखना था।
स्थानीय संस्कृति और खेती योग्य सीमित जमीन को बचाने की बड़ी चुनौती
पहाड़ी राज्यों की अपनी खास परंपराएं, लाइफस्टाइल और सामाजिक विशेषताएं होती हैं। बाहरी लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर लैंड परचेज करने से स्थानीय जनसंख्या का संतुलन बिगड़ सकता है। दूसरी बड़ी वजह खेती की जमीन को कमर्शियल इस्तेमाल से बचाना और किसानों के हितों की रक्षा करना है।
पहाड़ों में उपजाऊ और समतल जमीन काफी लिमिटेड मात्रा में उपलब्ध है। हमेशा यह बड़ा खतरा रहता है कि मैदानी इलाकों के रईस खरीदार आलीशान होटल, लग्जरी रिसॉर्ट्स या बड़े फार्म हाउस के लिए जमीन खरीद लेंगे। इससे स्थानीय किसानों के लिए खेती योग्य जमीन पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
हिमालय क्षेत्र का नाजुक पर्यावरण और इकोसिस्टम बचाना भी है मुख्य मकसद
पर्यावरण का संरक्षण भी इन सख्त कानूनों के पीछे एक बेहद महत्वपूर्ण फैक्टर है। पूरा हिमालयन रीजन इकोलॉजिकली बहुत ज्यादा सेंसिटिव जोन में आता है। पहाड़ों पर बड़े पैमाने पर होने वाले कंस्ट्रक्शन और अंधाधुंध कमर्शियल डेवलपमेंट से लैंडस्लाइड और दूसरी नेचुरल डिजास्टर्स का खतरा काफी बढ़ जाता है।
इन्हीं खतरों को देखते हुए हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार ने 1972 में ऐतिहासिक धारा 118 लागू की थी। यह कानून किसी भी नॉन-हिमाचली को राज्य में कृषि भूमि खरीदने से पूरी तरह रोकता है। हालांकि, स्पेशल गवर्नमेंट परमिशन से घर बनाने के लिए अधिकतम 500 वर्ग मीटर तक जमीन मिल सकती है।
उत्तराखंड सरकार ने भी अपने भूमि कानूनों को बनाया बेहद सख्त
हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर अब उत्तराखंड सरकार ने भी अपने लैंड लॉ को काफी मजबूत कर दिया है। जनता की लंबी मांग के बाद राज्य सरकार ने साल 2024-25 के दौरान नए सख्त नियम लागू किए हैं। इन नए नियमों ने जमीन की खरीद-फरोख्त पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।
नए लैंड रूल्स के मुताबिक अब उत्तराखंड के 13 पहाड़ी जिलों में से 11 जिलों में बाहरी लोग खेती या बागवानी के लिए जमीन बिल्कुल नहीं खरीद सकते। इस कड़े फैसले से उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बाहरी इंवेस्टर्स द्वारा बड़े पैमाने पर जमीनों पर कब्जा करने की कोशिशों पर पूरी तरह रोक लग गई है।

