Delhi News: दिल्ली में 650 करोड़ के मेडिकल खरीद घोटाले की जांच तेज, छह और स्वास्थ्य विभाग कर्मी रडार पर

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Delhi News: राजधानी दिल्ली में करोड़ों रुपये के मेडिकल उपकरण और दवा खरीद घोटाले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक शाखा यानी एसीबी ने तेज कर दी है। इस मामले में पहले से गिरफ्तार किए गए वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा स्वास्थ्य विभाग के छह अन्य कर्मचारी भी अब एसीबी की जांच के दायरे में आ गए हैं। एजेंसी उनकी संदिग्ध भूमिका की गहन पड़ताल कर रही है।

गिरफ्तार अधिकारियों से की जा रही पूछताछ

एसीबी वर्तमान में इस मामले में गिरफ्तार पूर्व डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल, नीरज चोपड़ा और डॉ. विनोद कुमार रंगा से पूछताछ कर रही है। इन आरोपियों से मिले अहम सुरागों और दस्तावेजों के आधार पर एजेंसी उन छह कर्मियों की संलिप्तता का पता लगा रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि ठोस सबूत मिलने पर इन सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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विजिलेंस विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में दवा खरीद प्रक्रिया के दौरान नियमों के उल्लंघन और संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ था। इसी रिपोर्ट के आधार पर 2 जून को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच टीम टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी मूल्यांकन और ठेका आवंटन जैसे सभी चरणों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि घोटाले की जड़ तक पहुंचा जा सके।

650 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप

यह पूरा मामला सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी के माध्यम से की गई 650 करोड़ रुपये की खरीद में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि अधिकारियों ने ई-टेंडर की शर्तों में जानबूझकर बदलाव किए, ताकि केवल चहेते सप्लायर्स को ही लाभ पहुंचाया जा सके। इस प्रक्रिया में अन्य कंपनियों को बाहर रखने के लिए शर्तों को काफी जटिल और पक्षपाती बनाया गया था।

एसीबी के अनुसार, सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी स्वास्थ्य विभाग के लिए दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की खरीदारी का काम देखती है। जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन की पूरी कार्यप्रणाली का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है। आने वाले समय में पूछताछ के लिए विभाग के कुछ अन्य अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा ताकि घोटाले में शामिल सभी चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

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