उत्तराखंड में UCC का बड़ा असर! तीन तलाक के बाद पति ने रखी ‘हलाला’ की शर्त, अब 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

Dehradun News: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कानूनी कदम सामने आया है। हरिद्वार के बुग्गावाला क्षेत्र में एक महिला को उसके पति मोहम्मद दानिश द्वारा कथित तौर पर ‘तीन तलाक’ देकर घर से निकालने का मामला तूल पकड़ चुका है। कानून की अनदेखी कर जब पति ने महिला को दोबारा अपनाने के लिए ‘हलाला’ जैसी कुप्रथा की शर्त रखी, तो प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया। इस मामले में अब पुलिस ने पति सहित नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।

इस पूरे प्रकरण में समाजसेवियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। पीड़ित महिला जब अपने भाई के साथ समाजसेवी अली खान के पास पहुंची, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के नए कानून (UCC) के तहत तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं का कोई स्थान नहीं है। हलाला की शर्त सुनकर अली खान ने कानूनी लड़ाई का संकल्प लिया और यूसीसी कानून निर्माण में सक्रिय रहे मनु गौड़ के सहयोग से पुलिस प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई। इसके बाद पुलिस ने गहन जांच कर आरोपियों पर शिकंजा कसा है।

UCC की धारा 32 के तहत कड़ी कार्रवाई, महिलाओं की जागरूकता पर जोर

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता की धारा 32(1)(2) और 32(1)(3) के प्रावधानों ने इस मामले में न्याय की राह आसान कर दी है। ये धाराएं स्पष्ट रूप से उन कृत्यों को अपराध मानती हैं जहां किसी महिला को तलाक के बाद उसी पुरुष से दोबारा शादी करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाने या विवाह करने के लिए मजबूर किया जाता है। पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट को इस नए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे भविष्य में ऐसी कुप्रथाओं पर लगाम लगेगी।

समाजसेवी अली खान, जो स्वयं एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं और वर्षों पूर्व अफगानिस्तान से देहरादून आकर बस गए थे, लगातार महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उनका मानना है कि मुस्लिम महिलाओं का शिक्षित और जागरूक होना अनिवार्य है ताकि वे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें। अली खान और उनकी टीम अब इस मामले को अंतिम अंजाम तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। यूसीसी के तहत हुई यह पहली बड़ी कार्रवाई राज्य में महिलाओं के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह देखी जा रही है।

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