एसी बन सकता है ‘मौत का बम’! विवेक विहार जैसी आग से बचना है, तो आज ही सुधार लें अपनी ये 5 घातक गलतियां

Delhi News: दिल्ली के विवेक विहार और ग्रेटर नोएडा में हाल ही में एयर कंडीशनर (AC) फटने से हुए दर्दनाक हादसों ने सबको झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं में कई लोगों की जान चली गई, जिससे घरेलू उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भीषण गर्मी और लू के दौरान एसी का उपयोग बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन जरा सी लापरवाही इसे विस्फोटक बना सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रखरखाव और सतर्कता से ऐसी जानलेवा दुर्घटनाओं को आसानी से टाला जा सकता है।

ज्यादातर मामलों में एसी में आग लगने का मुख्य कारण शार्ट सर्किट या ओवरहीटिंग होता है। जब हम बिना ब्रेक लिए घंटों तक एसी चलाते हैं, तो इसके कंप्रेसर और इंटरनल वायरिंग पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। पुराने तारों के घिस जाने या ढीले कनेक्शन की वजह से वोल्टेज के उतार-चढ़ाव पर चिंगारी निकलने लगती है। यह समस्या अचानक पैदा नहीं होती, बल्कि लंबे समय से की जा रही अनदेखी का नतीजा होती है, जो अंततः एक भयंकर हादसे का रूप ले लेती है।

एसी खराब होने के ये शुरुआती संकेत कहीं दे तो न दें बड़े हादसे को दावत?

एसी यूनिट में खराबी के संकेतों को पहचानना जीवन बचाने के लिए बेहद जरूरी है। अगर आपका एसी पर्याप्त ठंडक नहीं दे रहा है, तो यह रेफ्रिजरेंट गैस के रिसाव का संकेत हो सकता है, जो अत्यधिक ज्वलनशील होती है। इसके अलावा, यदि मशीन से जलने की गंध आए, असामान्य आवाजें निकलें या यूनिट बार-बार अपने आप ट्रिप होने लगे, तो इसे तुरंत बंद कर देना चाहिए। एयर फिल्टर और कंडेंसर काइल में धूल जमा होना भी हवा के बहाव को रोककर कंप्रेसर को खतरनाक स्तर तक गर्म कर सकता है।

सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुछ कड़े कदम उठाना अनिवार्य है। सबसे पहले, हर सीजन की शुरुआत में किसी प्रमाणित तकनीशियन से पूरी सर्विसिंग करवाएं और वायरिंग की जांच कराएं। वोल्टेज स्टेबलाइजर का उपयोग बिजली के झटकों से बचाव के लिए जरूरी है। इसके अलावा, एसी को 16 या 18 डिग्री के बजाय 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच चलाएं, ताकि कंप्रेसर पर लोड कम रहे। हर कुछ घंटों के अंतराल पर मशीन को आराम देना और फिल्टर की पाक्षिक सफाई करना एसी की उम्र और आपकी सुरक्षा, दोनों को बढ़ाता है।

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