Rajasthan News: राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की हालिया जांच में नीट पेपर लीक मामले को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच के अनुसार, नीट का प्रश्नपत्र परीक्षा से करीब तीन सप्ताह पहले ही माफियाओं के हाथ लग गया था। यह लीक पेपर राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा सहित देश के कुल 10 राज्यों में फैलाया गया। एसओजी ने अब तक की अपनी विस्तृत रिपोर्ट और हिरासत में लिए गए दो दर्जन से अधिक आरोपितों को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया है।
नासिक की प्रेस से लीक हुआ था नीट का असली प्रश्नपत्र
एसओजी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र नासिक स्थित प्रिंटिंग प्रेस से ही बाहर आ गया था। वहां से यह गुरुग्राम निवासी एमबीबीएस छात्र यश यादव तक पहुंचा। यश ने इस पेपर को राजस्थान सहित अन्य राज्यों के एजेंटों को मोटी रकम में बेचा। जांच में यह भी सामने आया है कि जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी दो भाइयों, दिनेश बिंवाल और मांगीलाल ने यश से 30 लाख रुपये में 27 अप्रैल को यह पेपर खरीदा था। दिनेश बिंवाल भाजपा से जुड़ा रहा है।
सीकर के कोचिंग सेंटर्स और ई-मित्र संचालकों की संदिग्ध भूमिका
प्रश्नपत्र हाथ लगने के बाद दिनेश बिंवाल ने इसे अपने बेटे रिषी को दिया, जो सीकर में कोचिंग कर रहा था। इसके बाद आरोपित ने खुद सीकर पहुंचकर 29 अप्रैल को कई लोगों को यह पेपर दो से पांच लाख रुपये में बेचा। सीकर में ई-मित्र संचालकों, कोचिंग संस्थानों और एक करियर काउंसलर राकेश मंडावरिया ने इसे ‘गैस पेपर’ बताकर छात्रों को बेचा। आरोपितों ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि नीट की परीक्षा में 99.9 प्रतिशत सवाल इसी पेपर से आएंगे।
एक ही परिवार के चार बच्चों के चयन पर गहराया संदेह
इस पूरे प्रकरण में सबसे संदिग्ध पहलू यह है कि आरोपित दिनेश और मांगीलाल के परिवार के चार बच्चों का चयन साल 2024 की नीट परीक्षा में एक साथ हुआ है। इनमें मांगीलाल के बेटे-बेटी सवाई माधोपुर और दौसा के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे हैं। वहीं, उनके एक अन्य भाई के बच्चे मुंबई और एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर में चयनित हुए हैं। एसओजी अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि क्या इन चयनों के पीछे भी पेपर लीक का ही हाथ है।
जांच की कमान अब सीबीआई के पास, 150 छात्र रडार पर
एसओजी के महानिरीक्षक अजयपाल लांबा ने पुष्टि की है कि राजस्थान इस पेपर लीक का मूल केंद्र नहीं था। प्रश्नपत्र राजस्थान पहुंचने से पहले ही अन्य राज्यों में लीक हो चुका था। एसओजी के अनुसार, लगभग 150 छात्रों के पास यह लीक प्रश्नपत्र समय से पहले पहुंच गया था। वर्तमान में सीबीआई इस मामले के अंतरराष्ट्रीय और अंतर्राज्यीय लिंक की जांच कर रही है। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ के बाद पेपर माफियाओं के पुराने संपर्कों को खंगाला जा रहा है।
इंटरनेट मीडिया के जरिए केरल तक पहुंचा लीक पेपर
जांच में तकनीकी साक्ष्यों से पता चला कि आरोपित रिषी ने केरल में एमबीबीएस कर रहे अपने एक मित्र को सोशल मीडिया के माध्यम से पेपर भेजा था। उस मित्र ने 2 मई की रात को सीकर में हॉस्टल चलाने वाले अपने पिता को यह पेपर फॉरवर्ड किया। इस डिजिटल ट्रेल ने जांच एजेंसियों को लीक के नेटवर्क को समझने में बड़ी मदद की है। हालांकि, आरोपितों के परिवार वाले इन आरोपों को निराधार बता रहे हैं, लेकिन एसओजी के पास पुख्ता दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं।


