महंगाई का डबल डोज: पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, अब चीनी की मिठास पड़ेगी जेब पर भारी!

New Delhi News: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट और घरेलू बाजार में बढ़ती महंगाई को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा रक्षात्मक कदम उठाया है। सरकार ने चीनी के निर्यात पर आगामी 30 सितंबर तक के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। वाणिज्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और कीमतों को काबू में रखना है।

घरेलू खपत और उत्पादन का बिगड़ता संतुलन

चीनी के चालू सीजन में उत्पादन और खपत के बीच का अंतर सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। इस साल अक्टूबर से सितंबर के सत्र में चीनी का कुल उत्पादन 280 लाख टन से कम रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके विपरीत देश में चीनी की वार्षिक घरेलू खपत 280 लाख टन के आंकड़े को पार कर चुकी है। मांग और आपूर्ति के इस असंतुलन के कारण बाजार में चीनी की कीमतें पिछले साल की तुलना में पहले ही बढ़ने लगी हैं।

महंगाई के आंकड़े भी इस समय सरकार को डरा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल महीने की खुदरा महंगाई दर में पिछले साल के मुकाबले तीन प्रतिशत से अधिक का उछाल देखा गया है। वहीं थोक महंगाई दर आठ प्रतिशत के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुकी है। जुलाई से सितंबर के बीच अक्सर स्टॉक की कमी के कारण कीमतें सबसे ज्यादा बढ़ती हैं। इसी जोखिम को कम करने के लिए निर्यात पर रोक लगाना सरकार के लिए बेहद जरूरी हो गया था।

मानसून और अल नीनो का उत्पादन पर साया

चीनी उत्पादन के प्रभावित होने के पीछे मौसम की अनिश्चितता एक प्रमुख कारक मानी जा रही है। इस साल मानसून पर ‘अल नीनो’ के प्रभाव की आशंका जताई गई है, जिससे बारिश में कमी आ सकती है। अगर गन्ने की फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिला, तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। चीनी मिलों के अनुसार अक्टूबर में नए सीजन की शुरुआत के समय केवल 40 से 45 लाख टन का स्टॉक रहने की उम्मीद है, जो सामान्यतः 80 लाख टन होता है।

भारत द्वारा चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का सीधा असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा। ब्राजील के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक देश है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर चीनी की कीमतों में भारी तेजी आने की संभावना है। सरकार ने पिछले साल 2022-23 में भी इसी तरह के कड़े कदम उठाए थे। वर्तमान वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए सरकार आम उपभोक्ताओं को महंगी चीनी के संकट से हर हाल में बचाना चाहती है।

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