महर्षि महेश योगी की संस्था की जमीन पर बड़ा लैंड स्कैम: ED ने दिल्ली-NCR में दी दबिश, फर्जीवाड़े के खेल से उठा पर्दा

New Delhi News: विश्व प्रसिद्ध योग गुरु महर्षि महेश योगी की संस्था ‘स्पीरिचुअल रिजेनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ (SRMF) की बेशकीमती जमीनों को हड़पने वाले भू-माफियाओं पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कड़ा शिकंजा कसा है। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कई पुलिस एफआईआर दर्ज होने के बावजूद यह फर्जीवाड़ा थम नहीं रहा था। अब ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए दिल्ली-एनसीआर में पांच प्रमुख ठिकानों पर छापेमारी की है।

मास्टरमाइंड की पहचान और छापेमारी की कार्रवाई

ईडी की जांच में इस करोड़ों रुपये के जमीन फर्जीवाड़े के पीछे दो मुख्य साजिशकर्ताओं की पहचान हुई है। दिल्ली के नारायण विहार के रहने वाले रामचंद्र मोहन और आकाश मालवीय इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं। ईडी की टीमों ने इन दोनों आरोपियों के घरों की गहन तलाशी ली है। इसके अलावा, नोएडा के तिलपताबाद गांव में फर्जी तरीके से 3.36 एकड़ जमीन खरीदने वाली कंपनी ‘सिंघवाहिनी इंफ्रा’ और उसके निदेशक प्रदीप सिंह के ठिकानों पर भी छापा मारा गया है।

इस गिरोह की कार्यप्रणाली का खुलासा करते हुए जांच अधिकारियों ने बताया कि ये लोग बेहद शातिराना तरीके से काम करते थे। एसआरएमएफ (SRMF) संस्था की जमीनों को बेचने के लिए गिरोह के सदस्य फर्जी अथॉरिटी लेटर, जाली बोर्ड रिजोल्यूशन और नकली मुहरों का इस्तेमाल करते थे। इसी फर्जीवाड़े की कड़ी में दिल्ली के बुराड़ी निवासी राम श्याम के यहां भी छापेमारी की गई है। 1963 में पंजीकृत हुई इस पुरानी संस्था की जमीनों पर गिरोह की नजर काफी समय से थी।

सर्किल रेट से आधी कीमत पर बेची गई जमीन

नोएडा की बेशकीमती जमीन के सौदे में भारी वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं। जांच के मुताबिक, दिसंबर 2025 में आकाश मालवीय ने नोएडा की 3.36 एकड़ जमीन ‘सिंघवाहिनी इंफ्रा’ को महज 16 करोड़ रुपये में बेच दी थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस जमीन की सरकारी सर्किल रेट के अनुसार कीमत 33.61 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके ठीक एक महीने बाद, जनवरी 2026 में इस जमीन को दोबारा वाम देव प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को बेच दिया गया था।

महर्षि महेश योगी की जमीनों को अवैध रूप से बेचने के मामले में अब तक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कुल सात एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि हुई है। इनमें से एक मामला 2011 का है, जिसमें छत्तीसगढ़ में 75 एकड़ जमीन फर्जी सेल डीड के सहारे बेची गई थी। वहीं, साल 2024 में मध्य प्रदेश के धार में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 3.48 करोड़ की जमीन हड़पी गई थी। ईडी अब इस पूरे मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है।

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories