HPU B.Ed Admission 2026: 1500 से अधिक छात्रों ने लिया प्रवेश, फिर भी क्यों खाली रह गईं बीएड की इतनी सीटें?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन में जनवरी दो हजार छब्बीस सत्र की प्रवेश प्रक्रिया समाप्त हो गई है। लोकप्रिय बीएड कोर्स में इस बार भी काफी सीटें खाली रह गई हैं। प्रशासन ने प्रवेश की अंतिम तिथि को कई बार बढ़ाया था। इसके बावजूद कुल चार सौ पचास सीटों में से केवल तीन सौ चौदह सीटें ही भर सकी हैं। एक सौ छत्तीस सीटें अब भी रिक्त हैं। यह स्थिति विश्वविद्यालय प्रबंधन के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है।

यूजीसी और डीईबी की मंजूरी के बाद भी नहीं भरे पद

सीडीओई ने खाली सीटों को भरने के लिए हर संभव प्रयास किया था। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो से विशेष मंजूरी ली गई थी। इस मंजूरी के बाद खाली सीटों पर दोबारा प्रवेश प्रक्रिया शुरू की गई थी। अधिकारियों को उम्मीद थी कि इस बार सभी सीटें आसानी से भर जाएंगी। लेकिन छात्रों का रुझान इस सत्र में कम देखने को मिला। बार-बार मौके देने के बाद भी एक सौ छत्तीस सीटें खाली रहना चिंताजनक है।

साल में दो बार होती है सीडीओई में प्रवेश प्रक्रिया

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सीडीओई विभाग में साल में दो बार दाखिला होता है। पहला सत्र जनवरी महीने में शुरू होता है। दूसरा सत्र जुलाई महीने में आयोजित किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े एक अलग ही कहानी बयां करते हैं। जनवरी बैच के दौरान अक्सर छात्रों की संख्या काफी कम रहती है। इसके विपरीत जुलाई बैच में हमेशा अधिक छात्र प्रवेश लेते हैं। इस साल भी जनवरी बैच में दाखिले का पुराना ट्रेंड दिखा है।

अन्य कोर्स में कुल पंद्रह सौ से अधिक छात्रों का दाखिला

बीएड में भले ही सीटें खाली रह गई हों, लेकिन अन्य कोर्स में स्थिति बेहतर है। जनवरी दो हजार छब्बीस सत्र के लिए सीडीओई की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस बार विभिन्न कोर्स में कुल पंद्रह सौ तेईस छात्रों ने दाखिला लिया है। यह आंकड़ा दूरस्थ शिक्षा के प्रति छात्रों के विश्वास को दर्शाता है। प्रशासन अन्य पाठ्यक्रमों में मिले सकारात्मक रिस्पॉन्स से काफी संतुष्ट नजर आ रहा है। दूरस्थ शिक्षा बहुत उपयोगी साबित होती है।

कला स्नातक यानी बीए कोर्स बना छात्रों की पहली पसंद

आंकड़ों पर नजर डालें तो बीए कोर्स छात्रों की पहली पसंद बनकर उभरा है। इस बार सीडीओई में चल रहे बीए कोर्स में सबसे अधिक छात्रों ने रुचि दिखाई है। कुल चार सौ अड़सठ छात्रों ने कला स्नातक की पढ़ाई के लिए पंजीकरण करवाया है। यह संख्या पिछले सत्रों के मुकाबले काफी अच्छी मानी जा रही है। कला विषयों में दूरस्थ माध्यम से पढ़ाई करना बहुत आसान होता है। अक्सर प्रतियोगी परीक्षा वाले छात्र इसे चुनते हैं।

संगीत विषय में दिखा सबसे कम रुझान, मात्र आठ दाखिले

जहां एक तरफ बीए कोर्स में दाखिले बहुत अधिक हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ संगीत विषय में छात्रों का रुझान बेहद निराशाजनक रहा है। इस सत्र में सबसे कम प्रवेश म्यूजिक विषय में ही दर्ज किए गए हैं। संगीत कोर्स में केवल आठ छात्रों ने ही अपना प्रवेश सुनिश्चित किया है। संगीत पूरी तरह से एक प्रयोगात्मक और कलात्मक विषय है। इसमें नियमित अभ्यास की बहुत अधिक जरूरत हमेशा होती है। शायद इसलिए इसमें रुचि कम है।

वाणिज्य और अर्थशास्त्र विभागों में प्रवेश की वर्तमान स्थिति

विश्वविद्यालय के वाणिज्य और अर्थशास्त्र विभागों के आंकड़े भी सामने आ गए हैं। बीकॉम कोर्स में इस बार चालीस छात्रों ने अपना पंजीकरण करवाया है। वहीं स्नातकोत्तर स्तर पर अर्थशास्त्र विषय की मांग भी काफी सीमित रही है। एमए अर्थशास्त्र में कुल पैंतीस विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से एमकॉम करने वालों की संख्या थोड़ी बेहतर है। एमकॉम कोर्स में एक सौ चौदह विद्यार्थियों ने दाखिला प्राप्त किया है। यह स्थिति बहुत स्पष्ट है।

राजनीति विज्ञान और अंग्रेजी में छात्रों का शानदार प्रदर्शन

कला संकाय के कुछ विषयों में छात्रों की भारी भीड़ देखने को मिली है। राजनीतिक विज्ञान इस सत्र में छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय साबित हुआ है। इस विषय में कुल एक सौ सत्रह विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इसके अलावा अंग्रेजी भाषा के कोर्स में भी बहुत अच्छा रुझान दिखा है। अंग्रेजी में एक सौ दो छात्रों ने दाखिला प्राप्त किया है। इतिहास विषय में भी अड़सठ छात्रों ने दूरस्थ शिक्षा को चुना है। यह एक अच्छा संकेत है।

हिंदी, शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों का लेखा-जोखा

अन्य महत्वपूर्ण विषयों की बात करें तो प्रवेश की स्थिति बहुत सामान्य रही है। शिक्षा विषय में कुल इकहत्तर छात्रों ने अपना दाखिला करवाया है। राष्ट्रभाषा हिंदी पढ़ने के लिए उनसठ छात्रों ने पंजीकरण कराया है। समाजशास्त्र जैसे विषय में सैंतालीस छात्रों ने प्रवेश लिया है। व्यावसायिक पाठ्यक्रम एमबीए में पैंतालीस छात्रों ने विशेष रुचि दिखाई है। पत्रकारिता एवं जनसंचार और लोक प्रशासन जैसे विषयों में दाखिले कम हुए हैं। पत्रकारिता में ग्यारह ने प्रवेश लिया है।

संस्कृत विषय में प्रवेश की स्थिति और भविष्य की चुनौतियां

देववाणी संस्कृत में भी प्रवेश का आंकड़ा बहुत अधिक उत्साहजनक नहीं रहा है। इस सत्र में संस्कृत पढ़ने के लिए केवल चौदह छात्रों ने दाखिला लिया है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन को और मेहनत करनी होगी। जनवरी सत्र में हमेशा से ही छात्रों का रुझान बहुत कम रहा है। विश्वविद्यालय को छात्रों को आकर्षित करने के लिए नई नीतियां बनानी होंगी। दूरस्थ शिक्षा प्रणाली को रोजगारोन्मुखी बनाने की सख्त आवश्यकता महसूस हो रही है।

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