Chandigarh News: हरियाणा और पंजाब के बाद अब केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में भी आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सुरक्षित नौकरी पॉलिसी बनाने की मांग बेहद तेज हो गई है। चंडीगढ़ के विभिन्न विभागों में कार्यरत लगभग 20 हजार आउटसोर्स कर्मचारी वर्तमान में ठेकेदारों और एजेंसियों के चंगुल में फंसे हैं।
लंबे समय से अस्थाई कमीशनखोरी और अवैध वसूली का आर्थिक शोषण झेल रहे इन कर्मचारियों को अब ठेकेदारों से परमानेंट मुक्ति का इंतजार है। पीड़ित कर्मचारियों का साफ कहना है कि उन्हें मिलने वाली कम सैलरी से आज के समय में परिवार का भरण-पोषण करना भी बेहद मुश्किल हो रहा है।
पंजाब और हरियाणा सरकार के फैसलों से जगी नई उम्मीद
कर्मचारियों में बढ़ते इस भारी असंतोष के बाद अब कर्मचारी संगठनों ने चंडीगढ़ यूटी प्रशासन के खिलाफ एक बड़ा और निर्णायक आंदोलन शुरू करने की पूरी तैयारी कर ली है। हाल ही में पड़ोसी राज्यों द्वारा लिए गए बड़े फैसलों से इन कर्मचारियों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा सरकार ने ‘कौशल रोजगार निगम’ का गठन करके हजारों कर्मचारियों को सीधे अपने अधीन ले लिया था और बीच से कांट्रेक्टर प्रथा को पूरी तरह बाहर कर दिया था। इसके बाद अब पंजाब सरकार ने भी कांट्रेक्ट पर कार्यरत 65 हजार से अधिक कर्मचारियों को राहत दी है।
ठेकेदारों के चंगुल से मुक्ति के लिए एकजुट हुए कर्मचारी संगठन
पंजाब सरकार द्वारा इन कर्मियों को सीधे सरकार के तहत लाने के निर्णय के बाद चंडीगढ़ के कर्मचारी भी लामबंद हो गए हैं। चंडीगढ़ में लंबे समय से कर्मचारी संगठन यूटी प्रशासन, नगर निगम, विभिन्न बोर्डों और कॉरपोरेशनों में कार्यरत कर्मियों को ठेकेदारों के चंगुल से मुक्त कराने की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि कांट्रेक्टर इन सीधे-साधे कर्मचारियों से हर महीने मोटी कमीशन वसूलते हैं। कई बार तो आधी सैलरी हड़प ली जाती है और तरह-तरह की अनुचित मांगें कर उनका मानसिक शोषण किया जाता है। इन्हीं गंभीर वजहों से अब आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई है।
चंडीगढ़ नगर निगम में ही कार्यरत हैं 8 हजार आउटसोर्स कर्मी
चंडीगढ़ के विभिन्न विभागों में कई ऐसे मामले भी प्रकाश में आ चुके हैं जहां कांट्रेक्टर द्वारा समय पर सैलरी जारी करने के बदले में कर्मचारियों से सीधे कमीशन मांगा जाता है। जो कर्मचारी यह अवैध कमीशन देने से मना करते हैं, उन्हें नौकरी से हटाकर नए लोगों को रख लिया जाता है।
आंकड़ों के अनुसार चंडीगढ़ में कुल अस्थाई कर्मचारियों की संख्या लगभग 35 हजार के आसपास है। इनमें से करीब 20 हजार कर्मचारी विशुद्ध रूप से आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से काम कर रहे हैं। अकेले चंडीगढ़ नगर निगम के भीतर ही ऐसे आउटसोर्स कर्मियों की संख्या आठ हजार के पार है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली विभाग के कर्मचारी भी हैं परेशान
नगर निगम के अलावा यूटी प्रशासन के स्वास्थ्य, शिक्षा, इंजीनियरिंग, बिजली और जलापूर्ति विभाग समेत अन्य सरकारी बोर्डों और संस्थानों में भी ये कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। चंडीगढ़ सबआर्डिनेट फेडरेशन के अध्यक्ष रणजीत मिश्रा ने प्रशासन से इन कर्मियों को सीधे विभागों के अधीन करने की वकालत की है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कई कर्मचारी ऐसे भी हैं जो साल 1992 के आस-पास से यानी पिछले करीब 34 वर्षों से लगातार काम कर रहे हैं। इसके बावजूद वे हर रोज नौकरी जाने के डर के साये में जीने को मजबूर हैं। उन्हें न तो समय पर वेतन मिलता है और न ही कोई सामाजिक सुरक्षा दी जाती है।
वहीं कर्मचारी नेता रणजीत सिंह हंस का कहना है कि जब चंडीगढ़ में पंजाब के नियम और कानून पूरी तरह लागू होते हैं, तो फिर कर्मचारियों के मामले में सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि प्रशासन को तुरंत डराने-धमकाने और वसूली का यह खेल बंद कर सुरक्षित पॉलिसी बनानी चाहिए।
Author: Jatin Sharma


