CBSE रिजल्ट विवाद: हैकर्स के हमले और लाखों छात्रों के भविष्य के बीच, दागी कंपनी पर बोर्ड को फिर क्यों हुआ भरोसा?

Delhi News: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बारहवीं की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए फिर से विवादित कंपनी कोएंप्ट एडुटेक पर भरोसा जताया है। साइबर हमलों और तकनीकी खामियों के बावजूद बोर्ड ने उसी वेंडर को स्कैनिंग का काम सौंपा है। हालांकि सुरक्षा के लिए पूरा डाटा अब सीबीएसई के अपने सर्वर पर सुरक्षित रखा गया है।

पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में कोएंप्ट कंपनी का आनलाइन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लगातार इस्तेमाल होगा। आईआईटी के एक अधिकारी के अनुसार, कंपनी ने अब तक करीब चालीस करोड़ पन्ने स्कैन किए हैं। इनमें से केवल तीस हजार पन्नों में ही तकनीकी समस्या सामने आई थी। यह आंकड़ा बहुत छोटा है। अब केवल इन्हीं पन्नों को दोबारा स्कैन किया जाएगा।

सीबीएसई के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चार जून तक कुल सत्तर हजार से ज्यादा शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें से तिहत्तर सौ आवेदन केवल अंकों के सत्यापन के लिए हैं। वहीं बासठ हजार से अधिक छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया है। छात्रों की चिंताओं को देखते हुए बोर्ड ने इस बार कड़े सुरक्षा कदम उठाए हैं।

डाटा सुरक्षा के लिए सीबीएसई का बड़ा कदम

पहले स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं और छात्रों का महत्वपूर्ण डाटा वेंडर के सर्वर पर मौजूद था। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पूरे डाटा को सीबीएसई के अपने सुरक्षित सर्वर पर लाया गया है। ओएसएम कोड की खामियां दूर करके इसे बोर्ड के डिजिटल ढांचे के अनुकूल बनाया गया है। इससे बाहरी सर्वर पर निर्भरता खत्म हुई।

क्या था पूरा ओएसएम विवाद?

बारहवीं कक्षा के परिणाम आने के बाद ओएसएम पोर्टल में गंभीर तकनीकी खामियां पाई गईं। छात्रों ने शिकायत की थी कि स्कैन किए गए पन्ने अधूरे या धुंधले थे। कई मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं के पन्नों का क्रम बदला हुआ था। डिजिटल और मूल कॉपी में अंतर देखकर छात्रों में भारी रोष था और मूल्यांकन पर सवाल उठे थे।

आईआईटी ने साइबर हमलों से बचाया

विवाद बढ़ने पर सीबीएसई ने आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों से सुरक्षा ऑडिट कराया। टीम ने दस दिनों तक सिस्टम की गहन जांच की। तीन जून को बोर्ड के पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर बड़ा साइबर हमला हुआ था। इसमें डिनायल ऑफ सर्विस के लाखों पैकेट भेजे गए थे। हालांकि विशेषज्ञों ने इन सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

पोर्टल की खामियों को उजागर करने में एथिकल हैकर निसर्ग की भूमिका अहम रही। आईआईटी अधिकारियों ने उन्हें अपनी खोज साझा करने के लिए आमंत्रित किया और उनके प्रयासों की तारीफ की। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इतने बड़े साइबर हमलों के बावजूद किसी भी छात्र का निजी डाटा लीक नहीं हुआ है और सभी सेवाएं सुचारू हैं।

Author: Rashmi Sharma

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