ईरान युद्ध की आग में झुलसी दुनिया: अमेरिका में मंदी की आहट, पेट्रोल के दाम सुनकर उड़ जाएंगे आपके होश

Washington News: ईरान युद्ध का असर अब केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहा है। इस युद्ध की आग ने अमेरिका और यूरोप को भी अपनी चपेट में ले लिया है। कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने दुनिया भर में कोहराम मचा दिया है। अमेरिका में मंदी का खतरा तेजी से मंडराने लगा है। यूरोप के देशों में भी भारी घबराहट का माहौल है। होर्मुज की खाड़ी से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। इससे तेल और गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह टूट गई है।

अमेरिका में मंदी का बड़ा खतरा

अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। इसके बावजूद वहां पेट्रोल के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। कच्चा तेल दिसंबर के निचले स्तर से 50 डॉलर प्रति बैरल महंगा हो चुका है। अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत 102 डॉलर के पार पहुंच गई है। साल 2022 के बाद पहली बार पेट्रोल 4 डॉलर प्रति गैलन के पार गया है। यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोनों कार्यकालों में पेट्रोल की सबसे ऊंची कीमत है। पॉलीमार्केट के एक सर्वे ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इस साल के अंत तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मंदी में फंसने की 40 फीसदी आशंका है। लोग खुद को मंदी के इस भयानक दौर के लिए तैयार कर रहे हैं।

यूरोप पर कोरोना जैसी तबाही का डर

अमेरिका के साथ यूरोप की हालत भी लगातार खराब हो रही है। जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने एक बहुत बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर ईरान युद्ध लंबा चला तो हालात बेकाबू हो जाएंगे। यूरोप और जर्मनी पर इसका असर कोरोना महामारी जितना भयानक हो सकता है। यूरोप में जेट फ्यूल की कीमत हाल ही में 100 फीसदी तक बढ़ गई है। यह स्थिति तब है जब अमेरिका और यूरोप खाड़ी देशों से कम तेल खरीदते हैं। फिर भी ग्लोबल मार्केट में बढ़ती कीमतों ने इनकी कमर तोड़ दी है।

एशियाई देशों का सबसे बुरा हाल

इस युद्ध की सबसे बड़ी कीमत एशियाई देश चुका रहे हैं। होर्मुज की खाड़ी से सबसे ज्यादा तेल इन्हीं देशों में आता है। फिलीपींस ने हालात बिगड़ते देख नेशनल एनर्जी इमरजेंसी लगा दी है। फिलीपींस अपना 98 फीसदी तेल पश्चिम एशिया से ही खरीदता है। वहां 28 फरवरी से लेकर अब तक पेट्रोल के दाम दोगुने हो चुके हैं। वियतनाम अपना 90 फीसदी कच्चा तेल मिडिल ईस्ट से मंगाता है। इसके अलावा सिंगापुर, साउथ कोरिया, ताइवान, मलेशिया और थाईलैंड भी बुरी तरह प्रभावित हैं। इन देशों का 70 फीसदी से ज्यादा तेल पश्चिम एशिया से ही आता है।

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