ईरान युद्धविराम से दुनियाभर में मचा तहलका, कच्चे तेल की कीमतों में आई ऐतिहासिक गिरावट, जानें वजह!

World News: अमेरिका और ईरान के बीच अचानक हुए युद्धविराम के ऐलान ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस कूटनीतिक सहमति का सीधा असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बहुत भारी गिरावट दर्ज की गई है। लंबे समय के बाद कच्चे तेल का भाव सौ डॉलर प्रति बैरल के नीचे आया है। इस ऐतिहासिक गिरावट ने भारत समेत कई देशों को बड़ी आर्थिक राहत दी है।

ब्रेंट और डब्लूटीआई क्रूड ऑयल में भारी गिरावट

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें बहुत तेजी से टूटी हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव करीब सोलह प्रतिशत तक गिर गया है। यह अब बानवे डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ चुका है। इसी तरह डब्लूटीआई क्रूड में पिछले छह सालों की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है। यह गिरकर पचानवे डॉलर के करीब पहुंच गया है। इन गिरती कीमतों से दुनियाभर के शेयर बाजारों में शानदार उछाल देखने को मिला है।

डोनाल्ड ट्रंप के ऐलान से होर्मुज जलडमरूमध्य खुला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो सप्ताह के सीजफायर की सख्त घोषणा की है। ईरान ने भी शांति योजना को बिना किसी देरी के मान लिया है। इस अहम समझौते के कारण दुनिया के प्रमुख व्यापारिक मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाएगा। ग्लोबल तेल और गैस का लगभग बीस प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। इस मार्ग के खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की सप्लाई चेन की रुकावटें खत्म होने की उम्मीद है।

भारत के लिए एक बहुत बड़ी आर्थिक राहत

भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग नब्बे प्रतिशत तेल दूसरे देशों से खरीदता है। युद्ध के कारण कच्चे तेल का दाम एक सौ तेरह डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया था। महंगी ऊर्जा ने देश में महंगाई और आयात बिल को बढ़ा दिया था। अब तेल की कीमतें सौ डॉलर से नीचे आ गई हैं। इससे भारत सरकार और आम जनता को काफी बड़ी राहत मिलेगी। शेयर बाजार में भी इस खबर के कारण तेज रौनक वापस आ गई है।

सप्लाई चेन सामान्य होने में लगेगा वक्त

बाजार विशेषज्ञों ने तेल आपूर्ति को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। उनका मानना है कि युद्ध के दौरान बंद हुए कुओं को तुरंत चालू करना आसान नहीं है। नई जगहों पर जहाजों की फिर से तैनाती करने में कई महीने लग सकते हैं। इसके अलावा तेल कंपनियों को अपना स्टॉक फिर से भरने में लंबा समय लगेगा। इसीलिए भारी गिरावट के बावजूद बाजार में अगले कुछ दिनों तक अस्थिरता बनी रहने की आशंका है।

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