महंगा हुआ ‘खाना और ठिकाना’: LPG की कीमतों में लगी ऐसी आग कि पीजी-हॉस्टल के किराये में हुआ भारी इजाफा, जेब खाली होने को तैयार!

Tamil Nadu News: भारत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी ने अब आम लोगों के रहने और खाने का बजट बिगाड़ दिया है। तमिलनाडु में हॉस्टल और पेइंग गेस्ट (PG) आवासों के संचालकों ने बढ़ती लागत का बोझ छात्रों और कामकाजी पेशेवरों पर डालने का फैसला किया है। इसके चलते अब रहने के किराये में करीब 10 प्रतिशत की सीधी वृद्धि की गई है। बढ़ते परिचालन खर्चों, खासकर खाना बनाने की बढ़ती लागत ने संचालकों को यह कड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।

तमिलनाडु में पीजी और हॉस्टल का बढ़ा किराया

न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, आईटी हॉस्टल और पीजी मालिकों के राज्य-स्तरीय संगठन ने आधिकारिक सूचना जारी कर दी है। किराये की ये नई दरें मंगलवार, 5 मई, 2026 से प्रभावी रूप से लागू होंगी। संगठन का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में खाना बनाने की लागत में भारी उछाल आया है। इसके कारण अब पुराने किराये पर हॉस्टल और पीजी चलाना संभव नहीं रह गया है। इस फैसले से राज्य के हजारों छात्रों और नौकरीपेशा लोगों की वित्तीय स्थिति प्रभावित होगी।

एलपीजी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल का गणित

यह ताजा संकट तब गहराया है जब शुक्रवार को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त वृद्धि मानी जा रही है। पिछले तीन महीनों से लगातार मासिक आधार पर कीमतों में इजाफा देखा जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है। यही कारण है कि तेल विपणन कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडरों के दाम बढ़ाने का फैसला किया है।

दिल्ली और अन्य शहरों में सिलेंडर के ताजा भाव

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (19 किलोग्राम) का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटलों, रेस्तरांओं और बड़े पीजी संस्थानों में किया जाता है। ताज़ा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में अब एक सिलेंडर की कीमत 3,071.5 रुपये के पार पहुंच गई है। जबकि पहले इसकी कीमत महज 2,078.50 रुपये के आसपास थी। कीमतों में इस भारी अंतर की वजह से छोटे और बड़े सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान परेशान हैं। लागत बढ़ने से अब बाहर खाना और घर से दूर रहना दोनों ही काफी महंगा हो चुका है।

पश्चिम एशिया संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा संकट का असर

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में हो रही अस्थिरता का सीधा असर भारतीय रसोई और जेब पर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में शांति बहाल नहीं होती, तब तक ऊर्जा की कीमतों में राहत की उम्मीद कम है। तमिलनाडु के पीजी संचालकों का कहना है कि अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो भविष्य में किराये में और अधिक सुधार करना पड़ सकता है। फिलहाल छात्रों के लिए यह बढ़ोत्तरी एक बड़ा आर्थिक झटका है।

आम जनता पर बढ़ता महंगाई का दोहरा बोझ

महंगाई की यह मार केवल किराये तक सीमित नहीं है, बल्कि कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से रेस्तरां में मिलने वाला खाना भी महंगा हो गया है। आम नागरिक पहले से ही बढ़ती खाद्य वस्तुओं की कीमतों से परेशान हैं और अब आवास खर्च में बढ़ोत्तरी ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। सरकार पर अब दबाव बढ़ रहा है कि वह इन बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए। तब तक कामकाजी पेशेवरों और छात्रों को अपनी बचत में कटौती करनी पड़ेगी।

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