India News: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत ने लेबनान में मासूम नागरिकों की बढ़ती मौतों पर गहरी संवेदना और चिंता व्यक्त की है। इजरायल की ओर से किए जा रहे ताबड़तोड़ हवाई हमलों के कारण वहां हालात बेकाबू हो चुके हैं। भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्पष्ट किया है कि आम लोगों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम और बदलती कूटनीतिक परिस्थितियों पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
लेबनान में फंसे भारतीयों की सुरक्षा पर बड़ा अपडेट
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हालिया बयान में लेबनान की स्थिति को बेहद परेशान करने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि नागरिकों का भारी संख्या में मारा जाना वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर खतरा है। भारत ने हमेशा इस अशांत क्षेत्र में स्थिरता और भाईचारे का खुला समर्थन किया है। प्रवक्ता ने जानकारी दी कि वर्तमान में लेबनान में लगभग 1000 भारतीय नागरिक निवास कर रहे हैं। भारत सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भारत की अहम भूमिका
भारत केवल एक मूकदर्शक नहीं है, बल्कि वह संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन ‘UNIFIL’ का एक सक्रिय और महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेबनान में शांति बनाए रखने के लिए भारतीय सैनिक इस मिशन के तहत धरातल पर कड़ा परिश्रम कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा युद्ध जैसे हालात बेहद गंभीर और चिंताजनक हैं। भारत शांति बहाली के लिए दुनिया के अन्य शक्तिशाली देशों के साथ मिलकर कूटनीतिक रास्तों की तलाश कर रहा है ताकि हिंसा को रोका जा सके।
खाड़ी देशों में भारत की कूटनीतिक सक्रियता
पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता और अधिक तेज कर दी है। प्रधानमंत्री के विशेष निर्देश पर कई कैबिनेट मंत्री इस समय खाड़ी देशों के महत्वपूर्ण दौरों पर हैं। भारत का मुख्य उद्देश्य अपनी ऊर्जा सुरक्षा को किसी भी कीमत पर अक्षुण्ण बनाए रखना है। खाड़ी देशों के साथ निरंतर संपर्क के माध्यम से तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। भारत वैश्विक संघर्ष के बीच अपने आर्थिक हितों की रक्षा कर रहा है।
विदेश मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री के अहम दौरे
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस समय मॉरीशस के दौरे पर हैं और इसके तुरंत बाद 11-12 अप्रैल को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की यात्रा करेंगे। इस यात्रा का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच रणनीतिक रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ बनाना है। वहीं दूसरी ओर, पेट्रोलियम मंत्री 9-10 अप्रैल को कतर में उच्च स्तरीय वार्ता कर रहे हैं। कतर ने भारत को भरोसा दिया है कि वह ऊर्जा संकट के समय में आपूर्ति को जारी रखेगा।
ऊर्जा सुरक्षा और पड़ोसी देशों की मदद
भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि वह संकटग्रस्त पड़ोसी देशों की मदद में भी सबसे आगे है। हाल ही में भारत ने दरियादिली दिखाते हुए श्रीलंका को 38 मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद सफलतापूर्वक भेजे हैं। इसके अलावा, मॉरीशस के साथ तेल और गैस की निरंतर आपूर्ति के लिए एक विशेष समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है। भारत की यह रणनीति उसे पूरे दक्षिण एशिया में एक बड़े और भरोसेमंद शक्ति केंद्र के रूप में स्थापित करती है।
लेबनान के पीएम का वॉशिंगटन दौरा और सीजफायर की पेचीदगियां
अंतरराष्ट्रीय खबरों के अनुसार, लेबनान के प्रधानमंत्री जल्द ही अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी का दौरा करने वाले हैं। यह महत्वपूर्ण दौरा अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे अस्थाई सीजफायर के दौरान हो रहा है। हालांकि, इस शांति समझौते पर अब दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या लेबनान में जारी हिंसा इस सीजफायर की शर्तों के तहत आती है? इजरायल फिलहाल सीधे बातचीत और सैन्य कार्रवाई जारी रखने पर जोर दे रहा है।


