India News: भारत सरकार ने ईरान में मौजूद अपने हजारों नागरिकों के लिए एक नई और बेहद महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि पश्चिम एशिया में मौजूदा सीजफायर का भारतीय नागरिक तुरंत फायदा उठाएं। सरकार ने भारतीयों से ईरान छोड़ने की अपील की है ताकि वे किसी भी आगामी सुरक्षा संकट से बच सकें। गौरतलब है कि भारत जनवरी 2026 से ही अपने नागरिकों को वहां से निकालने की कोशिश कर रहा है।
अर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित बाहर निकलने की सलाह
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने गुरुवार को महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि सीजफायर के बाद फिलहाल ईरान में शांति है। नागरिकों के लिए वहां से बाहर निकलने का यह सबसे सही अवसर है। सरकार ने विशेष रूप से दक्षिण ईरान में रह रहे भारतीयों को सड़क मार्ग अपनाने को कहा है। उन्हें उत्तर की ओर जाकर अर्मेनिया के रास्ते वतन लौटने की सलाह दी गई है।
ईरान में अभी भी मौजूद हैं हजारों भारतीय छात्र
आंकड़ों के अनुसार, पहले ईरान में लगभग दस हजार भारतीय नागरिक रह रहे थे। सरकार के लगातार प्रयासों के बाद भी वहां अब भी करीब 7,500 भारतीय नागरिक मौजूद हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन छात्रों की है जो वहां मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। भारत सरकार पहले भी अर्मेनिया और अजरबैजान के रास्तों का उपयोग करके कई नागरिकों को सुरक्षित निकाल चुकी है। छात्रों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
शनिवार की बैठक पर टिकी हैं सबकी निगाहें
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधिकारी फिलहाल सीजफायर की स्थिति पूरी तरह साफ होने का इंतजार कर रहे हैं। यदि शनिवार को पाकिस्तान में होने वाली अहम बैठक में सीजफायर पर पक्की सहमति बनती है, तो उड़ानों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके बाद यूएई, सऊदी अरब और कतर से भारत के लिए विशेष विमानों का संचालन शुरू हो सकता है। फिलहाल उड़ानों की संख्या 350 से घटकर महज 90 रह गई है।
जल्द शुरू होगा एयरलाइंस का सामान्य संचालन
खाड़ी क्षेत्र में जल्द ही हवाई यातायात व्यवस्था सुधरने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। गुरुवार को ही कतर से करीब दस नई उड़ानें भारत के लिए रवाना होने की तैयारी में हैं। निजी एयरलाइन ‘गल्फ एयर’ ने भी बहरीन और भारत के बीच सेवाएं शुरू करने का संकेत दिया है। इससे वहां फंसे भारतीयों के लिए स्वदेश वापसी की राह काफी आसान हो जाएगी। आने वाले दिनों में उड़ानों की संख्या में भारी बढ़ोतरी की संभावना है।


