हिमाचल में कुदरत का कोहराम! अप्रैल में बर्फबारी और 60km की रफ्तार से आंधी का अलर्ट, जानें अगले 5 दिन का हाल

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में कुदरत के तेवर एक बार फिर तल्ख हो गए हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस के सक्रिय होते ही राज्य की ऊंची चोटियों ने सफेद चादर ओढ़ ली है। राजधानी शिमला और मनाली जैसे पर्यटन स्थलों पर घने बादलों ने डेरा डाल दिया है। अप्रैल के महीने में भी पहाड़ों पर कड़ाके की ठंड पड़ रही है। लाहौल-स्पीति और किन्नौर में रुक-रुक कर हिमपात हो रहा है। मौसम विभाग ने आज और कल के लिए 10 जिलों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।

आसमान से बरसेगी आफत, ओलावृष्टि की भी चेतावनी

मौसम विभाग ने लाहौल-स्पीति और किन्नौर को छोड़कर बाकी सभी जिलों के लिए चेतावनी जारी की है। विभाग के मुताबिक, अगले 48 घंटों में तेज आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट भी दिया गया है। निचले इलाकों में चल रही तेज हवाओं ने तापमान में भारी गिरावट ला दी है। मैदानी इलाकों में रहने वाले लोग अभी भी गर्मी के बजाय हल्की ठंड का अहसास कर रहे हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर बीच-बीच में जारी रहने का अनुमान है।

अगले 5 दिनों तक जारी रहेगा येलो अलर्ट

हिमाचल में मौसम का यह मिजाज फिलहाल शांत होता नहीं दिख रहा है। मौसम विभाग ने 5 से 9 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में येलो अलर्ट जारी किया है। हालांकि, इस दौरान वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर आज की तुलना में थोड़ा कम होगा। 7 और 8 अप्रैल को बिजली गिरने और तेज हवाओं की गतिविधियां फिर से जोर पकड़ सकती हैं। पूरे सप्ताह मौसम अस्थिर बना रहेगा। मार्च महीने में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश हुई थी, जिसकी भरपाई अब अप्रैल की यह बेमौसम बरसात कर रही है।

पहाड़ों पर पारा गिरा, केलांग में 1.8 डिग्री तापमान

शुक्रवार को दर्ज किए गए आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल के कई शहरों में तापमान काफी नीचे चला गया है। शिमला का न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, मनाली में पारा 10.8 और धर्मशाला में 15 डिग्री दर्ज किया गया। केलांग में सबसे कम 1.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ है। कल्पा में भी तापमान 6.6 डिग्री तक गिर गया है। दूसरी तरफ, पांवटा साहिब और नेरी में तापमान 20 डिग्री से ऊपर रहा, जिससे वहां थोड़ी राहत बनी हुई है। मौसम के इस बदलते रुख ने बागवानों और किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है।

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