मोदी सरकार के 12 साल के दावों का सच: लखपती दीदी से हवाईअड्डों तक, आंकड़ों की इनसाइड स्टोरी

National News: जून 2026 में मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर देश के प्रमुख अखबारों में एक बड़े विज्ञापन के जरिए उपलब्धियों का ब्यौरा दिया गया। साल 2014, 2019 और 2024 में लगातार जीत दर्ज करने वाली इस सरकार के दावों की जब बारीकी से समीक्षा की गई, तो आंकड़ों में बड़ी अतिशयोक्ति सामने आई है।

विज्ञापन में दावा किया गया कि सरकार ने तीन करोड़ ‘लखपती दीदी’ बनाई हैं। सरकारी परिभाषा के अनुसार, स्वयं सहायता समूह (SHG) की वह महिला सदस्य लखपती दीदी है जिसकी सालाना पारिवारिक आय एक लाख रुपये से अधिक है। मार्च 2026 में संसद में सरकार ने बताया कि 3.07 करोड़ महिलाओं ने खुद को लखपती घोषित किया है।

श्रम बल के आंकड़ों में विरोधाभास

देश में 15 वर्ष से अधिक उम्र की कामकाजी महिलाओं की कुल आबादी करीब 53 करोड़ है। इसमें से महिला श्रम बल भागीदारी (LFPR) के तहत लगभग 22 करोड़ महिलाएं ही सक्रिय हैं। अगर तीन करोड़ लखपती दीदी के दावे को सच मानें, तो कार्यबल की हर सातवीं महिला लखपती की श्रेणी में आ जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह आय केवल महिला की निजी कमाई नहीं, बल्कि पूरे परिवार की कुल सालाना आय है। जिस देश में प्रति व्यक्ति औसत आय पहले से ही 2,05,324 रुपये हो, वहां किसी परिवार की कुल आय एक लाख रुपये होना कोई असाधारण बात नहीं है। इसलिए इस उपलब्धि को पूरी तरह सरकार की सफलता मानना सही नहीं है।

हवाईअड्डों की संख्या का वास्तविक सच

सरकार ने विज्ञापनों में दावा किया है कि देश में परिचालित (Operational) हवाईअड्डों की संख्या 74 से बढ़कर 164 हो गई है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र की गहरी समझ रखने वाले विश्लेषक इस आंकड़े को भ्रामक मानते हैं। आम नागरिक परिचालित हवाईअड्डे का मतलब केवल नियमित यात्री उड़ानों वाले कमर्शियल एयरपोर्ट से लगाते हैं।

इस 164 की सूची में सैन्य बेस, माल ढुलाई (Cargo) और ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले हवाईअड्डे भी शामिल हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘उड़ान’ योजना के तहत प्रस्तावित 774 मार्गों में से 403 पर कभी व्यावसायिक उड़ानें शुरू ही नहीं हो सकीं। विमानन उद्योग के अनुसार वास्तविक संख्या सिर्फ 120 है।

जनऔषधि केंद्रों का बाजार में हिस्सा

तीसरा बड़ा दावा 19,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र खोलने का है। वर्ष 2015 में फ्रेंचाइजी मॉडल पर शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य किफायती दवाएं देना है। भारत में दवा व्यापार का बाजार बहुत बड़ा है और वित्तीय वर्ष 2024-25 में खुदरा दवा का कुल कारोबार लगभग 2,25,000 करोड़ रुपये का रहा था।

इसी अवधि में सभी सरकारी जनऔषधि केंद्रों का कुल संयुक्त कारोबार मात्र 2,022 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह आंकड़ा देश के कुल खुदरा दवा बाजार के एक फीसदी हिस्से से भी कम है। इन आंकड़ों से साफ है कि योजनाएं जमीन पर काम तो कर रही हैं, लेकिन विज्ञापनों में उन्हें जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।

Author: Gaurav Malhotra

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories