Ayodhya News: अयोध्या रामलला मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी और गड़बड़ी के मामले में बड़ा मोड़ आया है. विशेष जांच दल यानी एसआईटी की नजर अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र पर टिक गई है. जांच का दायरा बढ़ने से पूरे मंदिर प्रशासन में हड़कंप मच गया है.
राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी इस बड़े घोटाले की तह तक जाने के लिए लगातार कड़ी पूछताछ कर रही है. इस जांच टीम में लखनऊ मंडल के कमिश्नर विजय विश्वास पंत और लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस. शामिल हैं. उनके साथ वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन कुमार भी मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं.
मुख्य आरोपी टिन्नू ने अनिल मिश्र पर लगाए गंभीर आरोप
एसआईटी को एक सप्ताह में अपनी शुरुआती रिपोर्ट और 15 दिनों में फाइनल रिपोर्ट शासन को देनी है. सूत्रों के अनुसार मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू से टीम ने पूरे दिन कड़ी पूछताछ की. टिन्नू पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ड्राइवर रह चुका है. उसने सीधे डॉ. अनिल मिश्र की भूमिका पर सवाल उठाए हैं.
आरोपी के इस बयान के बाद जांच एजेंसी के लिए अनिल मिश्र का पक्ष जानना बहुत जरूरी हो गया है. डॉ. अनिल मिश्र के पास ही मंदिर के चढ़ावे की गिनती, उसकी सुरक्षा और आंतरिक व्यवस्था की मुख्य जिम्मेदारी थी. एसआईटी यह जानना चाहती है कि इस बड़ी प्रशासनिक चूक के पीछे कौन जिम्मेदार है.
जांच शुरू होते ही अचानक चेन्नई चले गए थे डॉक्टर अनिल
इस पूरे मामले में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई है. एसआईटी की जांच शुरू होने से ठीक पहले डॉ. अनिल मिश्र अपनी आंखों के इलाज का बहाना बनाकर चेन्नई चले गए थे. अब उनके अयोध्या वापस लौटने के बाद जांच टीम उनसे किसी भी समय आमने-सामने पूछताछ कर सकती है.
इससे पहले एसआईटी की टीम ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय और मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव से भी लंबी बातचीत कर चुकी है. जांच एजेंसी ने अभी तक किसी अंतिम नतीजे की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. अनिल मिश्र से पूछताछ के बाद ही राम मंदिर घोटाले के इस बड़े रहस्य से पूरी तरह पर्दा उठ पाएगा.
Author: Raj Thakur


