Mumbai News: मुंबई में एक नामी प्राइवेट कंपनी को ‘बॉस’ के नाम पर आए फर्जी WhatsApp मैसेज की वजह से 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है। अकाउंट्स डिपार्टमेंट के एक सीनियर कर्मचारी ने नकली बॉस के निर्देशों का आंख मूंदकर पालन करते हुए बैक-टू-बैक 63 बड़े पेमेंट ट्रांसफर कर दिए।
जब ठगे गए कर्मचारी ने बाद में कागजी मिलान के लिए इनवॉइस मांगे, तब जाकर उसे इस महाधोखे का एहसास हुआ। मुंबई में इनॉक्स ग्रुप से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने त्वरित एक्शन लेते हुए अब तक चार शातिर जालसाजों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है।
अनजान नंबर पर लगी थी असली बॉस की डिस्प्ले पिक्चर
यह पूरा मामला बीते तीन जून को शुरू हुआ था। कंपनी के अकाउंट्स डिपार्टमेंट में कार्यरत डिप्टी जनरल मैनेजर गिरीश अमीन को एक अनजान नंबर से WhatsApp मैसेज मिला। मैसेज भेजने वाले साइबर ठग ने खुद को कंपनी का एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सिद्धार्थ जैन बताकर बड़ी चालाकी से बात की।
जालसाज ने गिरीश से कहा कि वे इस नंबर को उसका पर्सनल नंबर मानकर सेव कर लें। उसने इस गुप्त नंबर को किसी अन्य सहकर्मी के साथ शेयर न करने की हिदायत भी दी। ठग ने अपनी डिस्प्ले पिक्चर में असली डायरेक्टर जैन की फोटो लगाई हुई थी ताकि शक न हो।
इसके बाद मैसेज भेजने वाले अपराधी ने अमीन से कहा कि वह एक बेहद जरूरी मीटिंग में जा रहा है, इसलिए उसे बार-बार फोन कॉल न किया जाए। अमीन को लगा कि उसके असली बॉस ने ही उससे संपर्क किया है और वह बिना किसी जांच के झांसे में आ गया।
नकली निर्देश मिलते ही कर्मचारी ने कर दी पहली ट्रांजैक्शन
इसके तुरंत बाद ठग ने एक बैंक अकाउंट की जानकारी भेजी। उसने अमीन को कंपनी के खाते से तत्काल पैसे ट्रांसफर करने का आदेश दिया। अमीन ने बिना देरी किए 46.5 लाख रुपये की पहली ट्रांजैक्शन पूरी कर दी। यह तो बस उस बड़ी रकम की शुरुआत मात्र थी।
इसके बाद 3 से 15 जून के बीच अमीन ने अपने तथाकथित ‘बॉस’ के निर्देशों का लगातार पालन किया। उसने अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में 63 ट्रांजैक्शन कर डाले। इस तरह कंपनी के मुख्य अकाउंट से कुल 10.4 करोड़ (10,40,71,924) रुपये से ज्यादा की रकम साफ हो गई।
अकाउंटिंग के लिए इनवॉइस मांगने पर खुला बड़ा राज
बीते मंगलवार को जब अमीन ने कंपनी के आधिकारिक माध्यमों से असली डायरेक्टर जैन से संपर्क साधा, तब जाकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ। अमीन ने जब रूटीन अकाउंटिंग के मकसद से इन लेन-देन से जुड़े इनवॉइस मांगे, तो जैन ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश कभी दिया ही नहीं था।
धोखे का पता चलते ही अमीन ने तुरंत पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। जब मुंबई पुलिस ने अपनी तकनीकी जांच शुरू की, तो दिल्ली पुलिस को उन संदिग्ध बैंक अकाउंट्स के बारे में अहम सुराग मिले, जिनमें धोखाधड़ी का यह सारा पैसा ट्रांसफर किया गया था।
दिल्ली पुलिस के ऑपरेशन साइहॉक से दबोचे गए ठग
इसी बीच दिल्ली के साउथ-ईस्ट जिले की पुलिस को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की जसोला ब्रांच से एक गुप्त कॉल आया। बैंक अधिकारियों ने बताया कि दो संदिग्ध आदमी 8 लाख रुपये कैश निकालने आए हैं। पुलिस ने तुरंत जाल बिछाकर विकास और वंश नाम के दो आरोपियों को बैंक से दबोच लिया।
पूछताछ में दोनों ने कबूला कि वे मामूली कमीशन के बदले धोखाधड़ी की रकम को इधर-उधर घुमाने के लिए अपने बैंक अकाउंट्स दे रहे थे। उन्हें इस काम के लिए 30,000 और 20,000 रुपये का लालच मिला था। आगे की जांच में पुलिस ने फैयाज आलम और अमित को भी पकड़ा।
फैयाज ने बताया कि मुख्य सरगना ने फंड ट्रांसफर में मदद के बदले दो प्रतिशत कमीशन देने का वादा किया था। दिल्ली पुलिस ने हाल ही में शुरू हुए ‘ऑपरेशन साइहॉक’ के तहत बैंक अधिकारियों को अलर्ट रहने को कहा था, जिससे यह बड़ी कामयाबी हाथ लगी।
Author: Raj Thakur


