Punjab News: पंजाब की सियासत और सिख धार्मिक गलियारों में सोमवार को एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला। सिखों की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने एक कड़ा फैसला लिया है। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित कर पूरी राजनीति में हलचल मचा दी है।
यह पूरा विवाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद शुरू हुआ। इस वीडियो में मुख्यमंत्री पर गुरु घर और ‘गुरु की गोलक’ को लेकर बेहद आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणी करने के गंभीर आरोप लगे थे। इसके बाद से ही विभिन्न सिख संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही थी।
दो फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट के बाद आया बड़ा फैसला
अकाल तख्त के मुख्य जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने पांच सिंह साहिबानों की एक महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक बुलाई। इस मीटिंग के बाद उन्होंने फसील से अपना लिखित आदेश जारी किया। उन्होंने बताया कि इस वायरल वीडियो की जांच देश की दो अलग-अलग फोरेंसिक लैब से करवाई गई थी।
फोरेंसिक जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि वीडियो पूरी तरह असली है। इसमें किसी भी तरह की एडिटिंग, छेड़छाड़ या आधुनिक एआई तकनीक का इस्तेमाल नहीं हुआ है। इसी ठोस सबूत के आधार पर सभी सिंह साहिबानों ने सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ यह सख्त फैसला सुनाया।
मुख्यमंत्री पर लगा अकाल तख्त से असत्य बोलने का आरोप
ज्ञानी गर्गज ने मीडिया को बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहले खुद इस वीडियो की निष्पक्ष जांच के लिए अपनी मंजूरी दी थी। इसके बावजूद उन्होंने बाद में अकाल तख्त सचिवालय की तरफ से भेजे गए नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने सचिवालय को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
जत्थेदार ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने इस संवेदनशील मामले में अकाल तख्त के सामने झूठा बयान दर्ज कराया था। सिखों की सर्वोच्च पीठ के सामने असत्य बोलना बेहद गंभीर धार्मिक अपराध माना जाता है। इसी कारण धार्मिक संस्था ने मुख्यमंत्री के प्रति यह कठोर रुख अपनाया है।
पंजाब कैबिनेट और सिख विधायकों को किया गया तलब
अकाल तख्त ने बेअदबी विरोधी कानून को लेकर मौजूदा पंजाब सरकार को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है। जारी आदेश के मुताबिक, पंजाब के सभी राजनीतिक दलों के सिख विधायकों और पूरी कैबिनेट को आगामी 29 जून को अकाल तख्त के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।
इस बड़ी पेशी के दौरान सरकार से ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ पर विस्तार से जवाब मांगा जाएगा। इस ऐतिहासिक धार्मिक पीठ के कड़े रुख के बाद अब पंजाब की सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी सिख विधायकों की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं।
विवादित बेअदबी कानून पर सिख संस्थाओं ने जताई आपत्ति
अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का आरोप है कि पंजाब सरकार ने इस नए कानून को लागू करने से पहले सिख समुदाय और उनकी प्रतिनिधि संस्थाओं से कोई व्यापक चर्चा नहीं की। उन्होंने लोकतांत्रिक और धार्मिक तौर-तरीकों को दरकिनार कर इस बिल को सीधे पास कर दिया।
इन प्रमुख धार्मिक संस्थाओं ने पुरजोर मांग की है कि इस नए अधिनियम से उन विवादित धाराओं को तुरंत हटाया जाए, जो गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और सिख संगत की भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं। इस मांग को लेकर सिख समाज में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
विधानसभा से सर्वसम्मति से पास हुआ था कड़ा विधेयक
पंजाब विधानसभा ने इसी साल 13 अप्रैल 2026 को ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026’ को सदन में सर्वसम्मति से पारित किया था। इस नए और कड़े कानून में पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वाले दोषियों को उम्रकैद तक की सजा देने का प्रावधान है।
हालांकि, इस कड़े कानून के प्रावधानों को लेकर ही अब सरकार और सिख धार्मिक संस्थाओं के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। कानून में शामिल कुछ तकनीकी शब्दों और धाराओं पर अकाल तख्त ने आपत्ति जताई है, जिससे यह पूरा मामला एक बड़े विवाद में बदल गया है।
आम आदमी पार्टी का जत्थेदार पर राजनीतिक पलटवार
अकाल तख्त का यह बड़ा फैसला आने से ठीक पहले आम आदमी पार्टी ने भी अपना बचाव किया। पार्टी के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज सिंह पन्नू ने कहा कि जिन फोरेंसिक रिपोर्टों की बात हो रही है, उनमें वीडियो वाले व्यक्ति की स्पष्ट पहचान साबित नहीं की गई है।
उन्होंने जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने एक खास राजनीतिक पक्ष चुन लिया है। पन्नू ने याद दिलाया कि अकाल तख्त किसी एक राजनीतिक दल की जागीर नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के सिख समुदाय की एक सर्वोच्च और सम्मानित संस्था है।
धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में क्यों अहम है फैसला?
मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर लिया गया यह फैसला पंजाब के भविष्य के लिए बहुत मायने रखता है। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आएगा। इससे न केवल आम आदमी पार्टी की सरकार बैकफुट पर आएगी, बल्कि विपक्ष को भी एक बड़ा मुद्दा मिल गया है।
आने वाले दिनों में बेअदबी विरोधी कानून और इस धार्मिक आदेश को लेकर पंजाब सरकार और सिख संस्थाओं के बीच टकराव और ज्यादा गहरा होने की पूरी आशंका है। इस फैसले का असर पंजाब के आगामी चुनावों और सामाजिक ताने-बाने पर भी साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
Reported By: Gurpreet Singh


