Business News: लगातार डीएपी और यूरिया के उपयोग से खेतों की मिट्टी अपनी ताकत खो रही है। किसानों की इस बड़ी समस्या का समाधान अब मिल गया है। आरएमपीसीएल कंपनी ने महावीरा जिरोन पावर प्लस नाम से एक शानदार उर्वरक बाजार में उतारा है। यह उत्पाद फसलों को पूरा पोषण देकर पैदावार बढ़ाता है।
किसानों के बीच डीएपी का अत्यधिक उपयोग एक आम बात बन गई है। इसके कारण खेतों में फास्फोरस का संतुलन बिगड़ रहा है। मिट्टी में जिंक, बोरॉन और सल्फर जैसे बहुत जरूरी पोषक तत्वों की भारी कमी देखी जा रही है। इसका सीधा और बुरा असर फसल की गुणवत्ता और मात्रा पर पड़ता है।
आरएमपीसीएल के जाने-माने एग्रोनॉमिस्ट प्रमोद कुमार पाण्डेय ने इस गंभीर समस्या पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि किसानों को अब संतुलित पोषण की सख्त जरूरत है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए महावीरा जिरोन पावर प्लस को तैयार किया गया है। यह अकेला उत्पाद मिट्टी की हर जरूरत पूरी करता है।
क्या है न्यूट्रिशन का सिक्सर?
कंपनी ने ‘न्यूट्रिशन का सिक्सर’ नाम से एक बेहद खास और नई अवधारणा पेश की है। जिस तरह क्रिकेट में एक छक्का पूरे मैच का रोमांच बदल देता है, वैसे ही यह उर्वरक काम करता है। यह फसलों को एक ही बार में छह सबसे जरूरी पोषक तत्व देकर खेती की दिशा बदल देता है।
कंपनी के प्रबंध निदेशक विनीत जैन की सोच किसानों को सिर्फ उर्वरक बेचना बिल्कुल नहीं है। उनका मुख्य लक्ष्य किसानों को उनकी लागत का पूरा मुनाफा देना है। श्री जैन के मार्गदर्शन में कंपनी ऐसे उत्पाद ला रही है, जो खेती को लंबे समय तक टिकाऊ और ज्यादा लाभदायक बनाने में पूरी मदद करते हैं।
डीएपी से कैसे बेहतर है यह?
आम तौर पर डीएपी केवल नाइट्रोजन और फास्फोरस ही फसल तक पहुंचा पाता है। इसके विपरीत, महावीरा जिरोन पावर प्लस फास्फोरस और पोटाश के साथ-साथ कई अन्य तत्व भी देता है। इसमें सल्फर, जिंक, बोरॉन और मैग्नीशियम का एकदम सही मिश्रण है। इससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और मिट्टी हमेशा उपजाऊ रहती है।
इन छह तत्वों का मिलता है फायदा
इस खास उर्वरक में मौजूद फास्फोरस जड़ों का तेजी से विकास करता है। पोटाश पौधों को मजबूती और तनाव सहने की शक्ति देता है। सल्फर से फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है। जिंक पौधों की वृद्धि में मदद करता है। बोरॉन दाना बनने में और मैग्नीशियम फसल की हरियाली बनाए रखने में बेहद जरूरी है।
यह एक बहुत ही संतुलित मिश्रित उर्वरक है। इसका ग्रेड 16:19:11 के साथ सल्फर, जिंक, बोरॉन और मैग्नीशियम के मिश्रण से बना है। किसान धान, गेहूं, सोयाबीन, कपास, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों में इसका आसानी से उपयोग कर सकते हैं। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ ही बेहतरीन गुणवत्ता भी मिलती है।
मिट्टी परीक्षण की खास सलाह
विशेषज्ञ प्रमोद पाण्डेय ने सभी किसानों को एक बहुत ही महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल पुरानी परंपराओं के आधार पर उर्वरक बिल्कुल नहीं चुनना चाहिए। खेतों में किसी भी खाद का इस्तेमाल करने से पहले मिट्टी का परीक्षण जरूर कराएं। इससे लागत कम होगी और मुनाफा कई गुना बढ़ जाएगा।
Author: Rajesh Kumar


