Global Market News: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम करीब 4% तक टूट गए हैं। इस बड़ी गिरावट के बाद अब भारतीय उपभोक्ताओं के मन में पेट्रोल-डीजल के दाम घटने की उम्मीद जगी है।
फिलहाल देश की सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन की घरेलू कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई इस मंदी का सीधा लाभ आम ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है, तो पेट्रोल और डीजल की मौजूदा दरों में बड़ी राहत मिल सकती है। आइए जानते हैं कि इस कटौती से आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा।
जानिए बड़े शहरों में क्या हो सकते हैं नए दाम
यदि तेल कंपनियां कच्चे तेल में हुई इस 4% की गिरावट को पूरी तरह लागू करती हैं, तो देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल के दाम 102.12 रुपये से घटकर 98.5-99.0 रुपये प्रति लीटर तक आ सकते हैं। वहीं दिल्ली में डीजल भी 95.20 रुपये से कम होकर 91.8-92.5 रुपये के स्तर पर पहुंच सकता है।
उत्तर प्रदेश के नोएडा में वर्तमान में पेट्रोल 102.42 रुपये में मिल रहा है, जो घटकर 98.9-99.4 रुपये हो सकता है। इसके साथ ही नोएडा में डीजल की कीमत करीब 95 रुपये से कम होकर 91.5-92.5 रुपये प्रति लीटर पर आ सकती है। इससे एनसीआर के लाखों वाहन चालकों को सीधा फायदा पहुंचेगा।
आर्थिक राजधानी मुंबई में ईंधन के दाम हमेशा ऊंचे रहते हैं। यहां पेट्रोल की मौजूदा कीमत 111.21 रुपये है, जो संभावित कटौती के बाद 107-108 रुपये तक गिर सकती है। इसी तरह मुंबई में फिलहाल बिक रहा 97.83 रुपये का डीजल भी राहत के बाद 94-95 रुपये प्रति लीटर के आसपास मिल सकता है।
नवाबों के शहर लखनऊ में भी ईंधन की कीमतों में बड़ी राहत की उम्मीद है। लखनऊ में करीब 101.5-102 रुपये में बिक रहा पेट्रोल सस्ता होकर 98-99 रुपये तक आ सकता है। वहीं शहर में डीजल की मौजूदा कीमत करीब 94-95 रुपये से घटकर 91-92 रुपये प्रति लीटर होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
बिहार की राजधानी पटना की बात करें तो यहां फिलहाल पेट्रोल की दरें करीब 107-108 रुपये प्रति लीटर हैं। तेल कंपनियों की मेहरबानी के बाद यह घटकर 103-104 रुपये तक आ सकती हैं। इसके साथ ही पटना में डीजल का मौजूदा रेट करीब 94-95 रुपये से कम होकर 91-92 रुपये के स्तर पर आ सकता है।
आखिर क्यों आई कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव का अचानक कम होना है। निवेशकों और वैश्विक बाजारों को अब उम्मीद है कि आने वाले समय में दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई पहले की तरह ही पूरी तरह सामान्य बनी रहेगी।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से तेल की आवाजाही पर मंडरा रहा बड़ा खतरा अब टल गया है। जैसे ही वैश्विक बाजार से सप्लाई बाधित होने का डर खत्म हुआ, इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम तेजी से नीचे आ गए।
समझिए भारत में कैसे तय होते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर नहीं करते हैं। इसमें तेल को साफ करने की रिफाइनिंग कॉस्ट, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट का खर्च, डीलर्स का कमीशन, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला वैट भी शामिल होता है।
यही वजह है कि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल 4% सस्ता होने पर भी घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें उतनी नहीं घटती हैं। तेल कंपनियां इन सभी टैक्सों, डीलर मार्जिन और प्रोसेसिंग चार्ज को जोड़ने के बाद ही अंतिम खुदरा कीमत तय करती हैं, जिससे आम जनता को आंशिक राहत ही मिल पाती है।
Author: Rajesh Kumar


