New Delhi News: पश्चिम एशिया में बढ़ते भूराजनैतिक तनाव और ईरान संकट के बीच केंद्र सरकार ने देशवासियों और किसानों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने साफ किया है कि देश में कच्चे तेल, एलपीजी, प्राकृतिक गैस और खेती के लिए जरूरी खादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। संकट के बावजूद किसी भी किल्लत की आशंका नहीं है।
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश को आश्वस्त किया कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। भारत के पास 60 दिनों से अधिक की खपत के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बफर स्टॉक मौजूद है। इससे वैश्विक संकट का घरेलू बाजार पर असर नहीं पड़ेगा।
घरेलू उत्पादन बढ़ने से रसोई गैस (LPG) में आत्मनिर्भर हुआ भारत
भारत ने घरेलू उत्पादन बढ़ाकर एलपीजी के आयात पर अपनी निर्भरता को काफी कम कर लिया है। पहले जहां देश में घरेलू उत्पादन 32,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन था, वह अब बढ़कर 54,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गया है। देश के पास फिलहाल 75 से 80 दिनों की खपत का एलपीजी स्टॉक सुरक्षित है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मई 2022 से मई 2026 के बीच जहां दुनिया भर में पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही थीं, वहीं भारत में इनमें 3.1% की गिरावट आई है। एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती से सरकारी खजाने पर 1 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ा, लेकिन जनता को बड़ी राहत मिली।
वैकल्पिक ईंधन पर फोकस और दिसंबर 2026 तक का बड़ा लक्ष्य
सरकार पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन पर तेजी से काम कर रही है। देश में दिसंबर 2026 तक ई85 (E85) ईंधन पंपों की संख्या बढ़ाकर 500 करने का लक्ष्य है। वहीं दिसंबर 2027 तक इन आधुनिक पंपों की संख्या को बढ़ाकर 5,000 करने की बड़ी योजना तैयार की गई है।
किसानों को बड़ी राहत, पुरानी रियायती दरों पर ही मिलती रहेगी खाद
इंदौर में ब्रिक्स कृषि बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को बड़ी राहत दी। उन्होंने कहा कि खरीफ और आगामी रबी फसलों के लिए देश में खाद की कोई कमी नहीं है। वैश्विक स्तर पर दाम बढ़ने के बावजूद किसानों को यूरिया और डीएपी पुरानी रियायती दरों पर ही मिलेगी।
बढ़े हुए दामों का अतिरिक्त आर्थिक बोझ सरकार खुद उठाएगी ताकि किसानों पर असर न पड़े। मानसून को प्रभावित करने वाले अल नीनो जलवायु प्रभाव पर बात करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने इससे निपटने की पूरी तैयारी कर ली है। साथ ही देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
Author: Asha Thakur


