Telecom Tariff Relief: वोडाफोन-एयरटेल की हुई बल्ले-बल्ले, बॉम्बे हाई कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से संकट में फंसा टेलीकॉम सेक्टर उबरा

Delhi News: टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनियों भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को बॉम्बे हाई कोर्ट से एक बहुत बड़ी कानूनी तथा वित्तीय राहत मिली है। अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा इन दोनों कंपनियों पर लगाए गए भारी-भरकम ‘वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज’ को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद टेलीकॉम कंपनियों के सिर पर कई सालों से लटक रही एक बहुत बड़ी देनदारी की तलवार अब हमेशा के लिए हट गई है। इस फैसले से न सिर्फ कंपनियों को राहत मिली है, बल्कि पूरे टेलीकॉम सेक्टर में छाई अनिश्चितता भी खत्म हो गई है।

पिछली तारीख से नियम बदलना पूरी तरह गलत

हाई कोर्ट ने अपने कड़े फैसले में साफ कर दिया है कि केंद्र सरकार के पास यह अधिकार बिल्कुल नहीं है कि वह लाइसेंस जारी करने के बरसों बाद, पिछली तारीख से वित्तीय शर्तों में कोई मनमाना बदलाव करे। इस फैसले से कंपनियों को अपनी जमा कराई गई बैंक गारंटी भी वापस मिल जाएगी।

यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के चर्चित 2G स्पेक्ट्रम फैसले के बाद बहुत ज्यादा गरमाया था। उस समय दूरसंचार विभाग ने एकतरफा फैसला लेते हुए तय किया था कि जिन कंपनियों के पास जुलाई 2008 से अधिक स्पेक्ट्रम है, उनसे एक भारी अतिरिक्त शुल्क वसूला जाएगा।

कंपनियों ने कोर्ट में पेश की बेहद मजबूत दलीलें

सरकार ने इस अतिरिक्त शुल्क के लिए साल 2012 में कंपनियों को डिमांड नोटिस भेज दिए थे, जिसे एयरटेल और वोडाफोन ने अदालत में चुनौती दी। कंपनियों ने दलील दी कि भारतीय टेलीग्राफ एक्ट में ऐसा कोई नियम नहीं है जो सरकार को पिछली तारीख से अतिरिक्त चार्ज लगाने की शक्ति देता हो।

कंपनियां नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी के तहत पहले से ही तय रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल का पूरी ईमानदारी से पालन कर रही थीं। इसका मतलब है कि जब भी कंपनियों को अतिरिक्त स्पेक्ट्रम दिया गया, उन्होंने उसी अनुपात में सरकार को अपना रेवेन्यू-शेयर भी हमेशा बढ़ाकर चुकाया था।

मैच शुरू होने के बाद खेल के नियम नहीं बदल सकते

बॉम्बे हाई कोर्ट की खंडपीठ ने टेलीकॉम कंपनियों के इन तर्कों को शत-प्रतिशत सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि टेलीकॉम लाइसेंस अपने आप में एक कानूनी अनुबंध है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मैच शुरू होने के बाद खेल के नियम बीच में बिल्कुल नहीं बदले जा सकते।

सरकार ने इस मनमाने चार्ज को ‘जनहित’ का नाम देने की पुरजोर कोशिश की थी। लेकिन माननीय कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल सरकारी खजाना भरना जनहित नहीं हो सकता। इसके लिए नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जा सकती है।

आम मोबाइल ग्राहकों पर क्या होगा इसका सीधा असर?

भले ही यह मामला सरकार और कंपनियों के बीच का था, लेकिन इसका सीधा असर आम मोबाइल ग्राहकों पर भी पड़ेगा। अब जब एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के ऊपर से इस भारी जुर्माने का दबाव हट गया है, तो उनके पास भविष्य की 5G तकनीक को सुधारने के लिए अधिक पूंजी होगी।

एयरटेल ने भी हाई कोर्ट के इस फैसले का दिल से स्वागत किया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इस कदम से टेलीकॉम सेक्टर में नए निवेश को भारी बढ़ावा मिलेगा। इसका सीधा फायदा बेहतर नेटवर्क और सस्ती सर्विस के रूप में देश के करोड़ों ग्राहकों तक पहुंचेगा।

Author: Rajesh Kumar

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