Business News: भारत इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण एनर्जी ट्रांज़िशन (ऊर्जा बदलाव) के दौर से गुज़र रहा है। दशकों से देश की पूरी अर्थव्यवस्था कच्चे तेल के आयात, पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों और जीवाश्म ईंधन पर आधारित उद्योगों पर बहुत ज़्यादा निर्भर रही है।
जलवायु परिवर्तन से जुड़े बड़े वैश्विक लक्ष्यों, तकनीकी प्रगति और ऊर्जा सुरक्षा की चिंताओं के कारण भारत अब कदम आगे बढ़ा रहा है। देश धीरे-धीरे एक ऐसे साफ़-सुथरे भविष्य की ओर बढ़ रहा है, जहाँ रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा का पूरी तरह से बोलबाला होगा।
जीवाश्म ईंधन से दूरी और नेट-ज़ीरो का बड़ा लक्ष्य
भारत ने साल 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करने का एक बेहद महत्वाकांक्षी और दीर्घकालिक लक्ष्य तय किया है। इस बड़े लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए सरकार देश के पूरे एनर्जी इकोसिस्टम को नए सिरे से तैयार करने में जुटी हुई है।
मौजूदा समय में भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। यह विदेशी निर्भरता न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करती है, बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था पर भी हर साल लाखों-करोड़ों रुपये का भारी वित्तीय बोझ डालती है।
आयात के इस बड़े बोझ को कम करने के लिए नीति निर्माता लगातार कड़े कदम उठा रहे हैं। रिन्यूएबल एनर्जी, घरेलू ईंधन के नए विकल्पों और साफ़-सुथरी ट्रांसपोर्टेशन तकनीकों पर सबसे ज़्यादा ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, ताकि विदेशी तेल की ज़रूरत को खत्म किया जा सके।
साल 2030 से 2035 के बीच दिखेगा बड़ा बदलाव
आने वाले साल 2030 और 2035 के बीच भारत के ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व और बड़े बदलाव देखने की उम्मीद है। देश ने सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा की क्षमता को बढ़ाने में अब तक काफी उल्लेखनीय और बेहतरीन प्रगति हासिल की है।
भारत अब तेज़ी से गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से अपनी बिजली का एक बड़ा हिस्सा पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही, प्रदूषण फैलाने वाले भारी डीज़ल वाहनों को भी धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह हटाने पर गंभीरता से विचार चल रहा है।
इस बड़े बदलाव का एक और सबसे अहम हिस्सा पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग बढ़ाना है। सरकार का मुख्य लक्ष्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करने के लिए पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाना है।
कैसा होगा साल 2050 में भारत का ट्रांसपोर्ट?
भविष्य के साल 2050 तक भारत के ट्रांसपोर्टेशन का पूरा नज़ारा आज की तुलना में बिल्कुल अलग और आधुनिक हो सकता है। तब तक देश के टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर वाहन सेगमेंट में पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों का ही दबदबा कायम होगा।
भारी कमर्शियल ट्रांसपोर्ट सेक्टर में भी आने वाले समय में बहुत बड़े और चौकाने वाले बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ट्रकिंग और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में सीएनजी (CNG) और एलएनजी (LNG) जैसे प्राकृतिक गैस-आधारित ईंधन सबसे अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे।
भविष्य में कच्चे तेल की वैश्विक भूमिका भी पूरी तरह बदल सकती है। मुख्य रूप से वाहनों के ईंधन के तौर पर इस्तेमाल होने के बजाय, तेल का उपयोग तेज़ी से पेट्रोकेमिकल उद्योग में प्लास्टिक, रसायन और विभिन्न औद्योगिक सामग्रियों के उत्पादन के लिए किया जाएगा।
ग्रीन एनर्जी का ग्लोबल सुपरपावर बनेगा भारत
साल 2070 से 2076 तक भारत के ऊर्जा बदलाव के आखिरी चरण में एक ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था की कल्पना की गई है, जो पूरी तरह से कार्बन-न्यूट्रल होगी। ग्रीन हाइड्रोजन उन भारी उद्योगों के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत बनेगा, जिन्हें बिजली से चलाना मुश्किल है।
स्टील प्रोडक्शन, शिपिंग, एविएशन और लंबी दूरी के ट्रांसपोर्ट जैसे बड़े क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा। इसके साथ ही, देश की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए न्यूक्लियर एनर्जी (परमाणु ऊर्जा) में भी काफी बड़ी बढ़ोतरी की जाएगी।
इस पूरे बदलाव को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सड़कों पर पेट्रोल और डीजल देखना बेहद मुश्किल होगा। हालांकि ये ईंधन पूरी तरह खत्म नहीं होंगे, लेकिन आम जनता के लिए इनका व्यावसायिक इस्तेमाल लगभग समाप्त हो जाएगा।
Author: Rajesh Kumar


