Mumbai News: महाराष्ट्र की मशहूर ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन’ योजना को लेकर राज्य में भारी राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। सरकार की जांच रिपोर्ट में करीब 80 लाख महिलाएं अपात्र पाई गई हैं। इस बड़े खुलासे के बाद विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के कद्दावर नेता जयंत पाटिल ने मंगलवार को शिंदे-फडणवीस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इतनी बड़ी गड़बड़ी को लेकर कड़ी जवाबदेही तय करने की मांग की है। इस खुलासे से पूरे प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप मच गया है।
विपक्ष ने उठाए सरकारी पैसे के वितरण पर गंभीर सवाल
पूर्व मंत्री जयंत पाटिल ने सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि अगर 80 लाख लाभार्थी पूरी तरह फर्जी थे, तो सरकार ने उन्हें पिछले 20 महीनों तक इस योजना का लाभ क्यों दिया? उन्होंने इसके पीछे एक सुनियोजित और बड़े भ्रष्टाचार का गंभीर संदेह जताया है।
जयंत पाटिल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए नया दावा किया। उन्होंने कहा कि प्रति महिला 1,500 रुपये मासिक के हिसाब से इन अपात्र महिलाओं को लगभग 24,000 करोड़ रुपये बांटे गए। उन्होंने मांग की कि सरकार बताए कि जनता की इतनी भारी राशि की बर्बादी के लिए कौन जिम्मेदार है?
क्या चुनावी लाभ के लिए जनता की गाढ़ी कमाई का हुआ खेल
विपक्षी नेताओं का खुला आरोप है कि सरकार ने योजना शुरू करते समय कोई पुख्ता और पारदर्शी सत्यापन व्यवस्था नहीं बनाई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह लोक-लुभावन योजना केवल विधानसभा चुनाव में राजनीतिक फायदा उठाने के लिए बिना किसी जांच-पड़ताल के हड़बड़ी में चलाई गई थी?
आरसीपी नेता ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लाभार्थियों का अचानक अपात्र मिलना सामान्य बात नहीं है। सरकार को इस भारी चूक की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की पुरजोर वकालत की है।
महायुति सरकार ने सफाई देकर आरोपों को किया खारिज
दूसरी तरफ चौतरफा हमलों के बीच महाराष्ट्र सरकार ने तुरंत अपनी स्थिति साफ की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़े शब्दों में कहा कि इस कल्याणकारी योजना को किसी भी कीमत पर बंद नहीं किया जाएगा। सत्यापन के बाद भी 1.70 करोड़ पात्र महिलाओं को हर महीने पैसा मिलता रहेगा।
राज्य सरकार का दावा है कि ई-केवाईसी की सख्त प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इन अपात्र लोगों को पारदर्शी तरीके से हटाया गया है। सरकारी तंत्र इसे एक सामान्य शुद्धि प्रक्रिया बता रहा है। हालांकि विपक्षी दल इसे सरकारी खजाने की खुली लूट और घोर प्रशासनिक लापरवाही करार दे रहे हैं।
Author: Sachin Kulkarni


