राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का बड़ा दांव, जानिए छह सीटों का पूरा गणित और कौन से दिग्गज नेता हैं रेस में आगे

Delhi News: आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीतिक तैयारियां पूरी तरह से पुख्ता कर ली हैं। पार्टी का पूरा ध्यान इस बार चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करने पर केंद्रित है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस छह सीटों पर बेहद आसानी से जीत दर्ज कर सकती है।

रणनीति के तहत कर्नाटक में कांग्रेस आसानी से तीन सीटें जीत सकती है। आलाकमान ने तय किया है कि वह राज्य से दो स्थानीय और एक बाहरी उम्मीदवार को मैदान में उतारेगा। पार्टी यहां से मल्लिकार्जुन खरगे, सिद्दरमैया और शर्मिला रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाना चाहती है।

यदि सिद्दरमैया इस प्रस्ताव के लिए तैयार नहीं होते हैं, तो विकल्प के रूप में सौम्या रेड्डी और अंजलि निम्बालकर का नाम सबसे आगे चल रहा है। वहीं, आंध्र प्रदेश में वाईएस जगन मोहन रेड्डी से तालमेल की बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

झारखंड और कर्नाटक से पवन खेड़ा की दावेदारी मजबूत

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा भी कर्नाटक से टिकट पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। दरअसल, झारखंड में पार्टी को क्रॉस वोटिंग का बड़ा खतरा सता रहा है। हालांकि, झारखंड से पार्टी को एक सीट मिल सकती है, जहां से पवन खेड़ा का नाम चर्चा में है।

पार्टी नेतृत्व झारखंड की इस एकमात्र सीट पर पवन खेड़ा को उम्मीदवार बनाने के मूड में है। इसके साथ ही राजस्थान से भी कांग्रेस के दो बेहद बड़े दिग्गज नेताओं के नामों पर गहन मंथन का दौर लगातार जारी है।

राजस्थान से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भंवर जितेंद्र सिंह जैसे कद्दावर नेता अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। लेकिन वर्तमान दलित सांसद नीरज दांगी इस बार भी टिकट की रेस में सबसे आगे बने हुए हैं।

राजस्थान और मध्य प्रदेश में क्रॉस वोटिंग का बड़ा डर

मूल रूप से राजस्थान के निवासी पवन खेड़ा अपने गृह राज्य से भी टिकट के लिए पुरजोर दावेदारी जता रहे हैं। खेड़ा समर्थकों का तर्क है कि पार्टी ने हाल ही में हरियाणा से एक दलित नेता को राज्यसभा सांसद बनाया है।

बात अगर मध्य प्रदेश की करें तो यहां के समीकरण भी बेहद दिलचस्प हैं। मध्य प्रदेश से कांग्रेस आसानी से एक राज्यसभा सीट जीत सकती है। चूंकि, पिछली बार पार्टी ने अशोक यादव को राज्यसभा भेजा था, इसलिए इस बार मुकाबला रोचक है।

इस बार टिकट के लिए अरुण यादव और मीनाक्षी नटराजन के बीच सीधी और कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। हालांकि, दिल्ली दरबार की पसंद में मीनाक्षी नटराजन का पलड़ा थोड़ा भारी और आगे बताया जा रहा है।

दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के नामों पर दोबारा मंथन

मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाने पर आलाकमान को स्थानीय स्तर पर क्रॉस वोटिंग होने की खुफिया रिपोर्ट मिली है। इस बड़ी चुनौती से निपटने के लिए कांग्रेस नेतृत्व बेहद फूंक-फूंककर अपने कदम आगे बढ़ा रहा है।

क्रॉस वोटिंग के इसी खतरे को टालने के लिए पार्टी के पास मजबूत विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में संकटमोचक के तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के नाम एक बार फिर से बेहद मजबूत उम्मीदवार के रूप में सामने आए हैं।

कांग्रेस आलाकमान सभी राज्यों के क्षेत्रीय क्षत्रपों के साथ लगातार बैठकें कर रहा है। अंतिम सूची जारी होने से पहले पार्टी हर जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण को साधना चाहती है ताकि चुनाव में किसी भी तरह के नुकसान से बचा जा सके।

Author: Harikarishan Sharma

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