Iran News: ईरान की उरुमिया सेंट्रल जेल से आया एक वॉइस नोट पूरी दुनिया को झकझोर रहा है। साल 2022 के हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार हुए मेहराब अब्दुल्लाज़ादेह को हाल ही में फांसी दे दी गई। मौत से ठीक पहले भेजे इस संदेश में उन्होंने खुद को पूरी तरह बेकसूर बताया है।
मेहराब अब्दुल्लाज़ादेह पर बासिज मिलिशिया सेना के एक सदस्य की हत्या का झूठा आरोप था। सुरक्षा बलों ने कई महीनों तक उन्हें भयानक यातनाएं दीं। इसके बाद उनसे जबरन कबूलनामे पर दस्तखत करवाए गए। अंततः इस महीने की शुरुआत में बिना किसी निष्पक्ष सुनवाई के उन्हें मृत्युदंड दे दिया गया।
ईरान में राजनीतिक विरोध दबाने के लिए फांसी का इस्तेमाल
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। हाल के दिनों में ईरान ने कम से कम 32 राजनीतिक कैदियों को फांसी की सजा दी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार सरकार राजनीतिक विरोध को बेरहमी से कुचलने के लिए मृत्युदंड को एक बड़े हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।
पिछले साल ईरान में रिकॉर्ड 2,159 लोगों को मौत की सजा दी गई थी। यह आंकड़ा साल 1989 के बाद से अब तक का सबसे बड़ा और डराने वाला नंबर है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि अंदरूनी संकटों से घिरी ईरानी सत्ता लोगों में डर बिठाने के लिए ऐसा कदम उठा रही है।
अल्पसंख्यक समुदाय और युवा बन रहे प्रशासनिक क्रूरता का शिकार
न्यायिक प्रक्रियाओं में पूरी तरह से पारदर्शिता की कमी के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी आलोचना हो रही है। इस दमन चक्र का शिकार देश के अल्पसंख्यक समुदाय के लोग और होनहार युवा बन रहे हैं। हाल ही में 21 साल के कराटे चैंपियन सासन आज़ादवार को भी इसी तरह मौत के घाट उतारा गया।
इसी तरह एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के 29 वर्षीय छात्र इरफ़ान शकूरज़ादेह को 11 मई को फांसी दी गई। उन पर अमेरिकी और इसराइली एजेंसियों के लिए जासूसी का मनगढ़ंत आरोप था। मानवाधिकार संगठन ‘हेंगाव’ ने बताया कि बिना किसी ठोस सबूत के ही असंतुष्टों को सजा-ए-मौत दी जा रही है।
मेहराब ने अपने संदेश में फांसी का इंतजार कर रहे कैदियों की मानसिक पीड़ा बयां की थी। उन्होंने कहा था कि मौत की सजा पाए लोग रातभर सो नहीं पाते हैं। कुर्दिस्तान मानवाधिकार नेटवर्क के मुताबिक प्रशासन ने शव को परिवार तक को नहीं सौंपा और गुपचुप तरीके से अंतिम संस्कार कर दिया।
Author: Pallavi Sharma


