आरबीआई ने तोड़ा रिकॉर्ड, आम जनता को सोना खरीदने से मना कर खुद क्यों भर रहा है अपनी तिजोरियां?

New Delhi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश की जनता से एक साल तक सोना न खरीदने की भावुक अपील की थी। इसके पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे भारी दबाव को कम करना है। सरकार का मानना है कि आयात कम होने से रुपया मजबूत होगा।

दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ सरकार आम लोगों से सोना न खरीदने की अपील कर रही है, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय बैंक खुद रिकॉर्ड सोना खरीदकर अपनी तिजोरियां भर रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के पास इस समय कुल 880.5 टन सोना मौजूद है, जो अब तक का ऑल टाइम हाई स्तर है।

आरबीआई ने रचा इतिहास, विदेशों से वापस मंगाया सोना

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, आरबीआई ने साल 2021 से 2025 तक कुल 185 टन सोना खरीदा था। जबकि सिर्फ साल 2025-26 के दौरान ही सरकार ने रिकॉर्ड 168.6 टन सोना अपने खजाने में जोड़ लिया है। इसके साथ ही विदेशों में सुरक्षित रखे गए भारतीय सोने को भी तेजी से स्वदेश वापस मंगवाया जा रहा है।

भारत पहले अपने सोने का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशी बैंकों की तिजोरियों में रखता था। लेकिन अब आरबीआई चाहता है कि इस कीमती धातु पर भारत का पूर्ण और सीधा नियंत्रण हो। साल 2023 में देश के कुल सोने का केवल 38% हिस्सा भारत में था, जो अब बढ़कर लगभग 77% हो चुका है।

अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों का सता रहा है डर

विशेषज्ञों के मुताबिक, करीब 680 टन सोना अब भारत की अपनी घरेलू तिजोरियों में पूरी तरह सुरक्षित रखा जा चुका है। भारत के इस बड़े कदम के पीछे अमेरिका और पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों का डर है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिका ने रूस के 300 बिलियन डॉलर के विदेशी भंडार को फ्रीज कर दिया था।

इस बड़े वैश्विक घटनाक्रम के बाद से ही भारत अपनी आर्थिक संप्रभुता को मजबूत करने में जुट गया है। इसे वित्तीय जगत में ‘डी-डॉलराइजेशन’ कहा जाता है। किसी भी संभावित भू-राजनीतिक संकट या युद्ध जैसी स्थिति में अपने देश में रखा हुआ सोना तुरंत और बिना किसी बाधा के इस्तेमाल किया जा सकता है।

दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों में मची है सोना खरीदने की होड़

ग्लोबल मार्केट के मौजूदा हालातों को देखें तो भारत के अलावा चीन, ब्राजील, तुर्की और पोलैंड जैसे कई बड़े देश भी तेजी से सोना खरीद रहे हैं। चीन के पास इस समय 2300 टन से ज्यादा का विशाल गोल्ड रिजर्व मौजूद है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के सर्वे के मुताबिक 76% केंद्रीय बैंक अपना सोना बढ़ाना चाहते हैं।

वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक के कुल 880.5 टन सोने में से करीब 197 टन सोना अभी भी विदेशी तिजोरियों में ही रखा हुआ है। भारत अपनी जरूरत का लगभग पूरा सोना विदेशों से आयात करता है, जिसके लिए भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। ज्यादा आयात होने से देश से डॉलर बाहर जाते हैं और रुपया कमजोर होता है।

यही मुख्य वजह है कि सरकार आम जनता से सोना न खरीदने की अपील करती है ताकि देश का चालू खाता घाटा नियंत्रण में रहे। हालांकि, सोना पूरी तरह से डॉलर की जगह नहीं ले सकता, लेकिन भविष्य में अमेरिकी डॉलर के बढ़ते राजनीतिक इस्तेमाल को देखते हुए दुनिया भर के देश अब सोने को सबसे सुरक्षित एसेट मान रहे हैं।

Author: Rajesh Kumar

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