New Delhi News: देश के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र से एक बेहद परेशान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस पारंपरिक उद्योग में काम करने वाले करोड़ों कारीगर आज के डिजिटल दौर में भी भयंकर आर्थिक तंगी और बेहद कम उत्पादकता से जूझ रहे हैं।
इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट (IHD) और क्राफ्ट्स काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा सोमवार को जारी एक संयुक्त अध्ययन में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस ताजा रिपोर्ट के दावों के मुताबिक, देश के 1 करोड़ से अधिक शिल्पकार हर दिन औसतन महज 270 रुपये ही कमा पा रहे हैं।
सरकारी न्यूनतम मजदूरी से भी कम मिल रहा पैसा
इस स्टडी से साफ पता चलता है कि इन लाचार मजदूरों की दैनिक कमाई सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से भी काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और वैश्विक निर्यात बाजारों तक इस पारंपरिक सेक्टर की पहुंच अब बहुत ज्यादा सीमित होकर रह गई है।
महिलाओं के भरोसे चल रहा है पूरा उद्योग
यह महत्वपूर्ण सर्वे मुख्य रूप से देश के पांच प्रमुख राज्यों असम, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में किया गया है। सर्वे के आंकड़ों से पता चला है कि इस क्षेत्र की ज्यादातर इकाइयां घरों के भीतर से ही बहुत छोटे स्तर पर संचालित की जा रही हैं।
हथकरघा क्षेत्र में पुरुषों के मुकाबले महिला कामगारों की संख्या बहुत अधिक है। राजस्थान में तो इन घरेलू इकाइयों को संचालित करने वाली महिला मालिकों की संख्या रिकॉर्ड 94 फीसदी है। देश में केवल 2.6 प्रतिशत ही ऐसी बड़ी इकाइयां बची हैं, जहां 5 से अधिक मजदूर काम करते हैं।
चिंता की बात यह है कि इस उद्योग से जुड़ी ज्यादातर छोटी इकाइयां किसी भी औपचारिक सरकारी योजना या कार्यक्रम के तहत पंजीकृत नहीं हैं। औपचारिक खातों का हिसाब-किताब न होने के कारण इन गरीब कारीगरों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलने में भारी कठिनाई हो रही है।
Author: Rajesh Kumar


