‘एक देश-एक चुनाव’ पर NDA में ही उठे सुर! जदएस ने राष्ट्रपति और चुनाव आयोग के अधिकारों पर जताई सख्त आपत्ति

Delhi News: देश में ‘एक देश-एक चुनाव’ व्यवस्था को लागू करने के लिए लाए गए 129वें संविधान संशोधन विधेयक पर राजनीति गरमा गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दल जनता दल-सेक्युलर (JDS) ने इस विधेयक के कुछ बेहद महत्वपूर्ण प्रावधानों में बदलाव करने की मांग उठाई है।

बेंगलुरु में शनिवार को हुई संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की अहम बैठक के दौरान जदएस ने अपनी शर्तें सामने रखीं। पार्टी ने उस खास प्रावधान पर सबसे कड़ी आपत्ति जताई है, जिसके तहत निर्वाचन आयोग को किसी भी राज्य का विधानसभा चुनाव स्थगित करने के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है।

जदएस का मानना है कि इस प्रावधान में क्षेत्रीय दलों के हितों को ध्यान में रखकर उपयुक्त संशोधन किए जाने चाहिए। पार्टी ने गठबंधन सरकारों की स्थिरता सुनिश्चित करने और एक साथ होने वाले चुनावों के दौरान क्षेत्रीय दलों के अस्तित्व को बचाने के लिए मजबूत कानूनी सुरक्षा उपायों की भी मांग की है।

क्षेत्रीय दलों को राष्ट्रीय पार्टियों के दबदबे से बचाने की मांग

जेपीसी के साथ हुई इस चर्चा में जदएस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लोकसभा सांसद एम. मल्लेश बाबू और पूर्व सांसद डी. कुपेंद्र रेड्डी ने किया। पार्टी ने कहा कि वह कुछ शर्तों के साथ इस संशोधन का समर्थन कर रही है, ताकि राष्ट्रीय दलों के आक्रामक चुनाव प्रचार से क्षेत्रीय पार्टियों पर कोई विपरीत असर न पड़े।

दूसरी तरफ, इस बैठक में ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ की पूरी पहल का चौतरफा विरोध भी देखने को मिला। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने इस पूरी कवायद को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि यह सीधे तौर पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है।

कांग्रेस नेता डी.के. शिवकुमार ने जेपीसी के सामने आरोप लगाया कि यह कदम देश में सत्ता के केंद्रीकरण का एक सोचा-समझा प्रयास है। इससे भारत के मजबूत संघीय ढांचे (Federal Structure) को गहरा झटका लगेगा। जेपीसी फिलहाल विभिन्न राज्यों का दौरा कर इस संवेदनशील विधेयक पर सभी राजनीतिक दलों के विचार और सुझाव जुटा रही है।

Author: Harikarishan Sharma

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