Uttar Pradesh News: कानपुर में बोगस फर्म बनाकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाने का एक और बड़ा मामला सामने आया है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे जीएसटी पंजीकरण कराकर करीब 40 करोड़ रुपये की फर्जी खरीद-बिक्री दिखाई गई। इस तरह सरकार को 3.74 करोड़ रुपये के टैक्स का भारी नुकसान पहुंचाया गया।
इस बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े को लेकर राज्यकर विभाग की सहायक आयुक्त कविता श्रीवास्तव ने स्वरूप नगर थाने में लिखित तहरीर दी है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर ‘पीके इंटरप्राइजेज’ नाम की फर्म के संचालक अनिल कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
मई 2025 में हुआ था फर्म का फर्जी रजिस्ट्रेशन
दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार, आरोपी अनिल कुमार ने मई 2025 में अपनी इस फर्म का जीएसटी पंजीकरण कराया था। विभाग की तरफ से जब पंजीकरण के दौरान दिए गए पते का भौतिक सत्यापन (वेरिफिकेशन) कराया गया, तो मौके पर ऐसी कोई भी कंपनी चलती हुई नहीं पाई गई।
विभाग की जांच में मकान मालिक ने भी चौंकाने वाला खुलासा किया। भवन स्वामी ने साफ कहा कि फर्म संचालक द्वारा दिखाया गया किरायानामा (रेंट एग्रीमेंट) पूरी तरह फर्जी है। उस कागजात पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं और पूरे दस्तावेज को कूटरचित यानी जाली तरीके से तैयार किया गया है।
अमान्य मोबाइल नंबर और इनपुट टैक्स क्रेडिट का खेल
राज्यकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि जीएसटी पंजीकरण के समय जिस मोबाइल फोन नंबर का इस्तेमाल किया गया था, वह भी जांच में अमान्य और फर्जी पाया गया। जांच में सामने आया कि इस बोगस फर्म ने चालू वित्तीय वर्ष में सरकार को भारी आर्थिक चपत लगाई है।
फर्म ने 38.33 करोड़ रुपये की कुल जीएसटी देनदारी के मुकाबले बेहद शातिर तरीके से 4.12 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत लाभ उठा लिया। इस तरह कुल 3.74 करोड़ रुपये की सीधी कर चोरी की गई। एसीपी स्वरूप नगर शिखर ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर आगे की कानूनी जांच शुरू कर दी गई है।
Author: Ajay Mishra


