Washington News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर एक और बड़े हमले के साफ संकेत दिए हैं। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी वायुसेना के 11 सी-17ए मालवाहक विमान मध्य एशिया से यूरोप की तरफ उड़ान भर चुके हैं। इस भारी सैन्य हलचल ने पूरी दुनिया में एक बार फिर युद्ध की आशंका को गहरा कर दिया है।
पेंटागन की इस नई सैन्य गतिविधि ने 28 फरवरी की घटना की यादें ताजा कर दी हैं। उस समय भी ठीक ऐसी ही रणनीतिक हलचल देखी गई थी। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतिम क्षणों में ईरान पर होने वाले बड़े हमले की योजना को टाल दिया था। अब दोबारा वैसी ही स्थिति बनने से कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
अमेरिका और इजरायल की साझा युद्ध तैयारी
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक नई रिपोर्ट ने इस तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है। रक्षा अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर बड़ी सैन्य तैयारी कर रहे हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि पेंटागन के पास हर परिस्थिति से निपटने के लिए कई गुप्त योजनाएं तैयार हैं।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय जरूरत पड़ने पर तुरंत युद्ध शुरू करने की क्षमता रखता है। रक्षा मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि वे जमीनी हालात को देखकर फैसले लेंगे। इसके तहत अमेरिकी सैनिकों की संख्या को घटाया या पूरी तरह वापस भी बुलाया जा सकता है। फिलहाल अमेरिकी सेना पूरी तरह हाई अलर्ट पर नजर आ रही है।
ईरान के यूरेनियम ठिकानों पर हमले का खतरा
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अगर ट्रंप इस बार सैन्य कार्रवाई करते हैं, तो रणनीति काफी अलग होगी। इस बार अमेरिकी सेना मुख्य रूप से ईरान के बुनियादी ढांचों को निशाना बनाएगी। इसके साथ ही जमीन के अंदर छिपे ईरान के संभावित यूरेनियम भंडारों को पूरी तरह तबाह करने की बड़ी योजना बनाई गई है।
हाल ही में हुए 12 दिनों के भयंकर युद्ध में ईरान के परमाणु ठिकाने नष्ट हो गए थे। लेकिन सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ईरान का मुख्य यूरेनियम भंडार जमीन के नीचे सुरक्षित बच गया था। अमेरिका अब इसी बचे हुए हिस्से को निशाना बनाकर ईरान की परमाणु शक्ति को हमेशा के लिए खत्म करना चाहता है।
शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद भी नहीं सुलझा मुद्दा
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बेहद अहम मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद भी ईरान संकट का कोई शांतिपूर्ण समाधान नहीं निकल सका। बीजिंग से रवाना होने से ठीक पहले ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी और नए समझौते पर हस्ताक्षर करने को कहा।
ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम बेहद कमजोर मोड़ पर खड़ा है। अगर ईरान ने शर्तों को नहीं माना, तो उसे पूरी तरह बर्बाद कर दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी सेना किसी भी पल ईरान के खिलाफ दोबारा मोर्चा खोलने के लिए पूरी तरह तैयार बैठी है।
ईरान की पलटवार की चेतावनी और पाकिस्तान की मध्यस्थता
अमेरिकी धमकियों के बीच ईरान ने भी अपनी सेना को युद्ध के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगर गालिबाफ ने कहा कि वे अमेरिकी आक्रामकता का करारा जवाब देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि वाशिंगटन के गलत फैसलों का अंजाम खुद अमेरिका को भुगतना पड़ेगा।
इस बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री भी अचानक तेहरान पहुंचकर ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर रहे हैं। पाकिस्तान लंबे समय से दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इस्लामाबाद में हुई पिछले दौर की बातचीत विफल होने के बाद अब दोनों पक्षों में तनाव चरम पर पहुंच गया है।Author: Gaurav Malhotra, Delhi
Author: Gaurav Malhotra, Delhi


