Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने जेल सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बहुत बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के गंभीर और कुख्यात अपराधियों को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं किया जाएगा। सरकार ने ऐसे खतरनाक कैदियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कड़ा फैसला लिया है।
गृह विभाग ने इस नए नियम को लेकर अपनी आधिकारिक अधिसूचना भी पूरी तरह जारी कर दी है। नए आदेश के मुताबिक जिन कैदियों से समाज में शांति बिगड़ने का खतरा है, उन्हें जेल के अंदर ही रखा जाएगा। पुलिस पर हमला करने या फरार होने की आशंका वाले कैदी अब बाहर नहीं आएंगे।
हाल के दिनों में राज्य में कैदियों को कोर्ट ले जाते समय हमले की कई गंभीर घटनाएं हुई हैं। अपराधियों के साथियों ने पुलिस बल पर सरेआम फायरिंग करके उन्हें छुड़ाने की कोशिश की थी। कई बार प्रतिद्वंद्वी गिरोहों के आपसी टकराव से सार्वजनिक स्थानों पर दहशत का माहौल बन गया था।
इन सात श्रेणियों के अपराधियों पर रहेगा कड़ा पहरा
सरकार ने इस नई व्यवस्था के तहत अपराधियों की सात अलग-अलग श्रेणियां स्पष्ट तौर पर तय की हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले और देश विरोधी गतिविधियों के आरोपियों को जेल से बाहर नहीं निकाला जाएगा। इसके अलावा संगठित अपराध, सीरियल किलर और पेशेवर सुपारी किलर भी अब जेल में ही रहेंगे।
नशे के बड़े तस्करों और हिंसक डकैती के आरोपियों पर भी यह नया नियम कड़ाई से लागू होगा। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराध करने वाले पॉक्सो एक्ट के कैदी भी बाहर नहीं आएंगे। इन सभी चिन्हित अपराधियों की कोर्ट में केवल ऑनलाइन माध्यम से ही हाजिरी लगवाई जाएगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुरक्षित सुनवाई
अब इन विशेष श्रेणी के कैदियों को अदालत में व्यक्तिगत पेशी के बजाय सीधे जेल से ऑनलाइन जोड़ा जाएगा। अदालत, पुलिस और जेल प्रशासन के बीच एक बेहद सुरक्षित वीडियो लिंक स्थापित किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस आधुनिक तकनीक से सुरक्षा का बड़ा जोखिम हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
जेल अधीक्षक अपने स्तर पर संबंधित अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैदियों की नियमित पेशी सुनिश्चित करेंगे। इस नई डिजिटल प्रणाली से न केवल हिंसक वारदातों पर लगाम लगेगी, बल्कि कीमती पुलिस बल की भी बड़ी बचत होगी। सुरक्षा के लिहाज से इसे एक बड़ा प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है।


